फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: भौगोलिक और आध्यात्मिक भारत के बीच के अंतरसंबंधों को समझना आवश्यक

विज्ञापन
डीडीयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर मंचासीन मुख्य अति​थि प्रो. पृथ्वीश ना
विज्ञापन
गोरखपुर। नेशनल एटलस एंड थिएमेटिक मैपिंग आर्गेनाइजेशन (एनएटीएमओ) के निदेशक प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि एक अवधारणा और प्रयोग है। भौगोलिक और आध्यात्मिक भारत के बीच के अंतरसंबंधों को समझना आवश्यक है।
विज्ञापन


वह रविवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयामों का अध्ययन आवश्यक है।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भूगोल का अध्ययन केवल पृथ्वी की संरचना को समझना नहीं बल्कि पर्यावरण, संसाधन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को पहचानना भी है। विशिष्ट अतिथि एनएटीएमओ के पूर्व निदेशक प्रो. वीसी झा ने कहा कि भारत की भौगोलिक अवधारणा को समझने के लिए इतिहास, संस्कृति और परंपरा को साथ लेकर चलना होगा।
विज्ञापन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी ने कहा कि आज के समय में केवल मैपिंग ही नहीं बल्कि संसाधनों की निरंतर मॉनिटरिंग भी आवश्यक है। प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी ने भी विचार रखे।

संगोष्ठी के निदेशक प्रो. एसके सिंह ने स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि संगोष्ठी में 332 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें आठ सत्रों में कुल 285 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। संयोजन डाॅ. अंकित सिंह, संचालन डाॅ. श्रीप्रकाश सिंह व आभार ज्ञापन डाॅ. स्वर्णिमा सिंह ने किया।
संगोष्ठी के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार दिव्या मिश्रा की टीम को मिला। सर्वश्रेष्ठ माॅडल प्रस्तुति का पुरस्कार अंकित दुबे की टीम को दिया गया।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें