गोरखपुर में गांवों के प्राथमिक विद्यालयों, सामुदायिक भवनों में क्वारंटीन किए गए लोगों के मनोरंजन को लेकर भी जिला प्रशासन फिक्रमंद है। उन्हें घर से टीवी मंगाकर सेंटर पर लगाने की छूट दी गई है। इसके अलावा सभी क्वारंटीन सेंटरों पर पत्रिकाएं और कहानियों की किताबें पहुंचाने की कवायद भी चल रही है।
इसके लिए वेंडरों से बात की जा रही है। घर की रसोई से खाना मंगाने की छूट पहले ही दी गई थी। अब सेंटरों पर बनवाए जा रहे खाने में एक दिन पनीर की सब्जी भी शामिल करने का निर्णय किया गया है।
जिले के 20 ब्लॉकों में अब तक दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा आदि प्रांतों से आए 13618 लोग क्वारंटीन किए जा चुके हैं। इनमें हाल-फिलहाल में आए 5958 लोग पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों, सामुदायिक या पंचायत भवनों में क्वारंटीन किए गए हैं। जबकि उसके पहले 7660 लोगों को उनके घरों में क्वारंटीन किया गया है।
बाहर से आए पुरुषों को स्कूलों में जबकि महिलाओं और बच्चों को घर में ही क्वारंटीन किया गया है। घर से अलग स्कूलों में क्वारंटीन किए गए लोगों के शुरूआती दो-तीन दिन तो कट गए मगर अब उनके सामने समय काटना चुनौती है। इस तकलीफ को कई लोगों ने प्रशासनिक अफसरों से भी साझा किया।
कुछ सेंटरों पर तो क्वारंटीन किए लोग ताश की पत्तियां और मोबाइल पर गाने, वीडियो देखकर अपना मनोरंजन कर ले रहे हैं, मगर कई सेंटरों पर बिना मनोरंजन के किसी साधन के समय काटना मुश्किल है।
सीडीओ हर्षिता माथुर ने कहा कि जागरूकता बढ़ी है। लोग, खुद और अपनों की सुरक्षा के लिए धैर्य के साथ क्वारंटीन सेंटरों में प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। उन्हें दिक्कत न हो इसलिए मनोरंजन के लिए घर से टीवी मंगाकर लगाने की छूट दी गई है। उनके लिए पत्रिकाओं और कहानी की किताबों का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। घर से खाना मंगाने की छूट पहले से है। स्कूलों में बनने वाले खाने में भी एक दिन पनीर देने को कहा गया है।