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Gorakhpur News: ऑनलाइन गेमिंग में शिक्षक ने गंवाए 80 लाख, अब डिप्रेशन में पहुंचे

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में चल रहा इलाज
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रुपये गंवाने के बाद दिमाग में आ रहे थे खुदकुशी के ख्याल


गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग की लत एक शिक्षक पर इतनी भारी पड़ी कि उन्होंने करीब 80 लाख रुपये गंवा दिए। बड़ी रकम डूबने के बाद वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए और उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार आने लगे। परिजन उन्हें इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग लेकर पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, 46 वर्षीय शिक्षक पत्नी के साथ मनोरोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे थे। जांच के दौरान उन्होंने डॉक्टर को बताया कि ऑनलाइन गेमिंग में लगातार पैसे लगाने के कारण उनकी करीब 80 लाख रुपये की रकम डूब गई। आर्थिक नुकसान के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए और उनके मन में बार-बार आत्महत्या के विचार आने लगे।
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मरीज की मानसिक स्थिति को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होकर इलाज कराने की सलाह दी। हालांकि वार्ड में जाने के कुछ समय बाद ही वह वहां से निकल गए। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के चिकित्सक डॉ. तपस आइच ने बताया कि मरीज ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण बड़ी रकम गंवा चुके थे। इसके बाद वह गंभीर डिप्रेशन का शिकार हो गए। उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए भर्ती कर इलाज कराने की सलाह दी गई थी।

पहले भी आ चुके हैं मामले
केस 1
35 वर्षीय एक व्यक्ति की नौकरी चली गई। इसके बाद उसे फ्रीफायर गेम की लत लग गई थी। लत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसने गेम में लाखों रुपये गंवा दिए। शुरुआत में कुछ रुपये मिले लेकिन बाद में सब डूब गए। पैसे तो डूबे ही, वह अवसादग्रस्त भी हो गया। बाद में वह मनोवैज्ञानिक के पास पहुंचा जहां उसकी काउंसिलिंग की गई।
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केस 2
गोरखनाथ इलाके के एक किशोर ने ऑनलाइन गेमिंग में लगभग 60 लाख रुपये गंवा दिए थे। रकम गंवाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे एम्स में भर्ती कराना पड़ा। किशोर गेम के दांव-पेंच में फंस गया और उसने बैंक लेन-देन के जरिये इतना बड़ा नुकसान कर लिया। घटना के बाद उसने आत्महत्या की धमकी भी दी, जिस पर परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाकर इलाज कराया था।

बचाव के तरीके
- ऑनलाइन गेमिंग के लिए रोजाना समय सीमा तय करें और उसका पालन करें।
- गेम में पैसे लगाने (इन-एप खरीदारी या सट्टानुमा गेम) से बचें।
- परिवार के साथ खुलकर आर्थिक लेनदेन और गेमिंग की आदत पर बात करें।
- गेमिंग की जगह खेल, व्यायाम, पढ़ाई या अन्य रुचियों को समय दें।

- मानसिक तनाव या आर्थिक नुकसान होने पर अकेले न रहें, परिजनों से बात करें।
- जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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