गोरखपुर। गुलरिहा में नौकरी और आर्थिक लाभ का झांसा देकर बेरोजगार युवकों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह की जांच में अहम जानकारियां मिली हैं। साइबर सेल को जांच के दौरान जालसाजों के इस्तेमाल किए जा रहे आठ बैंक खाते मिले हैं। इन खातों में करीब 48 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन लोगों से खातों में आई और बाद में किन-किन बैंक खातों में भेजी गई। इसके साथ ही गिरोह के सरगना की तलाश भी तेज कर दी गई है।
गुलरिहा पुलिस ने मामले में चार आरोपियों रवि निषाद, विनय साहनी, आलोक साहनी और अंकित दुबे को गिरफ्तार कर स्पेशल कोर्ट पेश कर जेल भेजा है। आरोप है कि आरोपी बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने और आर्थिक लाभ का भरोसा देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों के एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और अन्य बैंक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे। इन्हीं खातों में अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाई जाती थी।
जांच में सामने आए आठ खातों में हुए करीब 48 लाख रुपये के लेनदेन ने पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। साइबर सेल बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन का ब्योरा खंगाल रही है। किस खाते में कितनी रकम आई, रकम भेजने वाले कौन थे और उसे आगे किन खातों में ट्रांसफर किया गया, इसका मिलान किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि खातों से नकदी निकाली गई या रकम को दूसरे बैंक खातों के जरिये आगे भेजा गया। मामले में रामपुर बुजुर्ग निवासी शुभम निषाद की तहरीर पर गुलरिहा थाने में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। थाना प्रभारी गुलरिहा जेपी पाल ने बताया कि जांच में सामने आ रहे बैंक खातों और लेनदेन से गिरोह के अन्य गुर्गों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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सरगना तक पहुंचने के लिए खातों की कड़ियां जोड़ रही साइबर सेल
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बैंक खातों के लेनदेन के आधार पर गिरोह के सरगना की पहचान में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आठों खातों में हुई रकम की जांच पूरी होने के बाद ठगी के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।