इतने ट्रेंड कारीगरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या होगी। करीब दो महीने पहले इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने शहर के कुछ प्रमुख उद्योगपतियों और अफसरों के साथ बैठक की थी, जिसमें इसका विकल्प खोजने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद इस पर चर्चा तेज हुई।
सहायक उपायुक्त उद्योग रवि शर्मा ने बताया कि उद्योगों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने के लिए सीएफसी खोलने का प्रस्ताव है। एक संस्था की तरफ से इसके लिए आवेदन किया गया है। उसके प्रस्ताव को अब जिला स्तरीय समिति को भेजा जाएगा। उस समिति की मंजूरी मिलने के बाद इस पर बजट जारी हो जाएगा।
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कपड़ा कारोबार से लंबे समय से जुड़े और चैंबर ऑफ रेडिमेड गारमेंट्स इंडस्ट्रीज के चेयरमैन रमाशंकर शुक्ला ने बताया कि दिल्ली-मुंबई, सूरत आदि बड़े औद्योगिक शहरों के अच्छे कारीगर और मैनेजर तत्काल गोरखपुर का रुख कर लेंगे, ऐसा संभव नहीं है। शुरुआत में हमें वे ही कारीगर मिलेंगे, जो किसी कारणवश या तो बड़े शहरों से लौटें हैं, या फिर वे वेतन और बड़े शहरों के खर्चे के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे हैं।
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ऐसे में हमें गोरखपुर में भी ऐसा प्रशिक्षण संस्थान चलाना होगा, जिसमें अच्छे कारीगर व मैनेजर तैयार किए जा सकें। इसीलिए गीडा में एक सीएफसी खोलने का निर्णय लिया गया। पांच मंजिला इस संस्थान में एक हजार मशीनें लगाई जाएंगी और काम की चाहत रखने वालों को अलग-अलग प्रकार के प्रशिक्षण देकर नई कंपनियों में उनकी जरूरत के अनुसार प्लेसमेंट दिलाया जाएगा।
गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि गीडा में तेजी से नए और बड़े उद्योग स्थापित हो रहे हैं। आने वाले कुछ वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर ट्रेंड वर्करों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने पर विचार चल रहा है। गारमेंट्स, प्लास्टिक समेत अन्य ट्रेंड के लिए प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। अभी पूरा ध्यान गीडा के स्थापना दिवस कार्यक्रम को भव्य बनाने पर है। उसके बाद प्रशिक्षण केंद्र के मामले को आगे बढ़ाया जाएगा।