गोरखपुर में ऑन कॉल के भरोसे चल रहे जिले के करीब 300 अस्पतालों पर अगले महीने मान्यता का संकट आ जाएगा। इनमें से अधिकांश वे अस्पताल हैं, जिनका संचालन कोई डॉक्टर नहीं बल्कि दूसरे लोग कर रहे हैं। मई में जब अस्पतालों की मान्यता का नवीनीकरण होगा, तब एक डॉक्टर का एक ही अस्पताल में पंजीकरण मान्य होगा।
ऐसी स्थिति में दूसरे अस्पतालों के डॉक्टरों के भरोसे चल रहे अस्पताल बंद करने पड़ेंगे। जिले में क्लीनिक, पैथालॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंग होम मिलाकर करीब 800 अस्पताल संचालित हैं। इनमें लगभग 500 डॉक्टर कार्यरत हैं।
लगभग 300 अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन गैर चिकित्सक करते हैं। वहां अपनी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर ऑन कॉल प्रैक्टिस करते हैं। इस ऑनकाल व्यवस्था ने ही शहर में अवैध अस्पतालों का जाल मजबूत कर दिया।
अस्पताल संचालन के पेशे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तमाम ऐसे अस्पताल हैं जो पंजीकरण के समय किसी डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल करते हैं। कुछ दिन वह डॉक्टर एक या दो घंटे के लिए ओपीडी में बैठ जाते हैं। बाद में वह अस्पताल डॉक्टर के बजाय झोला छाप संचालित करने लगते हैं।
पिछले दिनों पुलिस ने इन मरीज माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा था
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किसी बड़े अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोग ही ऐसे अस्पतालों में डॉक्टर बन जाते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज से लेकर ऑपरेशन तक करने लगते हैं। अवैध रूप से संचालित ईशु अस्पताल में जब पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा तो वहां जो व्यक्ति खुद को डॉक्टर बता रहा था, वह इसी प्रकार का था।
इन सब मामलों के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइड लाइन जारी की, जिसमें यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि एक डॉक्टर का ही एक अस्पताल में पंजीकरण मान्य होगा। अगर उनके नाम पर पंजीकरण हो रहा है तो उन्हें इस बात का शपथ पत्र देना होगा कि वे उस अस्पताल में एक साल तक प्रैक्टिस करेंगे।
जांच में अगर दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों के प्रैक्टिस की बात सामने आई तो मान्यता निरस्त होगी। अस्पताल प्रबंधन उसी डॉक्टर का बोर्ड लगा सकेंगे, जिसके नाम पर उस अस्पताल का पंजीकरण होगा। इन नए नियमों ने अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
30 अप्रैल तक होगा आवेदन, मई में होगा पंजीकरण
अभी जो गाइड लाइन है उसके अनुसार अस्पतालों के पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए विभागीय पोर्टल पर 30 अप्रैल तक आवेदन करना है। इसके बाद एक मई से आवेदन पत्रों के सत्यापन के बाद पंजीकरण या नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया करीब 20 मई तक चलेगी। जिले में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 800 अस्पताल हैं, जिनका नवीनीकरण होना है। सीएमओ दफ्तर के अनुसार हर दिन 20-25 आवेदन आ रहे हैं।
सीएमओ डॉ आशुतोष दूबे ने बताया कि अवैध अस्पतालों पर रोक लगाने के लिए ही नियमों में सख्ती की गई है। इस नियम का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। जिससे कि गोरखपुर और आसपास के मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिले और उनके साथ धोखाधड़ी रुके। पंजीकृत डॉक्टर इस व्यवस्था में सहयोग करेंगे।