इसके अलावा नान फाइलर (अपंजीकृत) के टर्नओवर की समीक्षा करते हुए रिटर्न दाखिल करने के साथ देय राजस्व जमा हुआ या नहीं, इस पर भी निगाह रहती है। नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठान एआई के निशाने पर आ जाते हैं। इसके बाद जीएसटी टीम प्रतिष्ठानों पर जाती है और जांच पड़ताल करके कार्रवाई करती है। वहीं, ऐप के माध्यम से टोल पर भी गाड़ियों के आवाजाही और ई-वे बिल निर्धारण पर नजर रखी जाती है।
एडिशनल कमिश्नर देवमणि शर्मा ने बताया कि आर्टिफिशियल टूल के माध्यम से पिछले दिनों व्यापारियों के परिसर में छापा मारा गया था। इसके माध्यम से अब बाजार में व्यापारियों पर नजर रखी जा रही। संवाद
150 मामलों में 35 व्यापारी मिले लापता
साधारण कारोबार करने वाले किसी कारोबारी का अगर एक माह के अंदर अचानक बहुत ज्यादा टर्नओवर हो जाता है तो वह संदिग्ध माना जाता है। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। पिछले महीने ऐसे 150 मामलों की जांच की गई तो 35 व्यापारियों का पंजीकरण बताए गए पते पर नहीं था। इन सभी का नाम काली सूची में डाल दिया गया है।
ई-वे बिल निरस्त करवाने पर पकड़ में आए
सूत्रों ने बताया कि कुछ प्रकरण ऐसे मिले हैं, जिसमें किसी कारोबारी ने अपने माल के परिवहन के लिए ई-वे बिल बनवाया और 72 घंटे में रद्द कराकर पैसे बचा लिए। जब व्यापारी ने ई-वे बिल कैंसल करवाया तब तक गाड़ी सभी टोल पार कर चुकी थी, लेकिन ई-वे बिल कैंसल कर व्यापारी ने दिखाया कि उसका माल बिका नहीं। इसलिए वह जीएसटी भरने का पात्र नहीं है। ऐसा बार-बार होने पर एआई ने शहर के कुछ व्यापारियों को चिह्नित किया है।