कार्यालय में अपर सीएमओ के साथ बैठक करते एडीएम।
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कोरोना संक्रमण से लोगों के बचाव में जुटे स्वास्थ्य कर्मी खुद की परवाह किए बना लडाई लड़ रहे हैं। अब तक 300 से अधिक स्वास्थ्य कर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स संक्रमित हो चुके हैं। जबकि 25 दिनों के भीतर कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से दो डॉक्टर और एक आशा कार्यकर्ता की मौत चुकी है। अपनों को खोने का दर्द बयां करते हुए एडीएम मनोज सिंह और अपर सीएमओ डॉक्टर मोहन झा की आंखें नम हो गईं, लेकिन यही बताए कि फर्ज पहले और परिवार बाद में है।
मार्च 2020 से कोरोना की शुरुआत हुई थी। तभी से स्वास्थ्य कर्मी लोगों की कोरोना से बचाव में जुटे हैं। करीब 1700 आशा कार्यकर्ता भी कोरोना से बचाव में लोगों की मदद कर रही हैं। निगरानी समिति में शामिल होकर लोगों को दवाओं का किट उपलब्ध करा रही हैं और उन्हें समुचित उपचार मिले, इसके लिए जरूरी सुझाव भी दे रही हैं। जबकि 350 नियमित स्वास्थ्य कर्मी हैं और करीब 700 संविदा कर्मी हैं। जिले में एसीएमओ के नौ पद हैं और सिर्फ तीन की तैनाती है।
इसी तरह डिप्टी सीएमओ के सात पद हैं और सभी पद रिक्त हैं। एनेथिसिया के दो डॉक्टर हैं ,जबकि तीन डॉक्टर होना जरूरी है। छह सीएचसी और तीन जगह पीएचसी क्रियाशील हैं। सबसे अधिक मैन पॉवर की कमी है। संसाधन रहते हुए भी मैन पॉवर की कमी से लोगों को बेहतर सेवाएं देने में अड़चन है। कोरोना के शुरुआती दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरी ताकत झोंकी।
पिछले एक साल से अधिक समय से स्वास्थ्य कर्मी बिना थके, बिना हारे 12-12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। वैसे अब कोरोना संक्रमण की जद में आने वालों की संख्या में काफी गिरावट आई है। इसकी वजह खुद लोग जागरूक हो गए हैं। कोरोना नियमों का पालन करने लगे हैं।