ये था पूरा मामला, ऐसे किया हेरफेर
आरोपी डाक कर्मियों ने वर्षों से बंद पड़े खातों की लिस्ट बनाई थी। उन सभी खातों में रुपये थे, लेकिन खाते बंद हो गए थे। मतलब सक्रिय नहीं थे। इसके बाद इन खातों से दूसरे फर्जी या डाक कर्मियों ने अपने जानने वाले ग्राहकों के खातों में रुपये भेज दिए। ये सभी नए खाते 2018 से लेकर अभी के बीच हैं।
सूत्रों ने बताया कि शैलेश के पास डाकघर के सभी शाखाओं के जिम्मेदारों की आईडी और पासवर्ड था। मृत पड़े खातों से जीवित खातों में रुपये ट्रांसफर करने के अलावा पेंशन व ब्याज की रकम भी उसी खाते से निकाल ली थी। जांच में सामने आया है कि कई अन्य डाकघरों के कर्मियों ने सूची तैयार करने में मदद की थी। इसके बदले उन्हें भी उनका हिस्सा मिलता था।
करोड़ों रुपये का हेरफेर हो सकता
सूत्रों ने बताया कि दो मामले जो सामने आए उसके मुताबिक दो खाते से ही लगभग दो लाख रुपये का हेरफेर सामने आया। ऐसे ही अगर तीन हजार खातों को जोड़ लें और औसत 40 हजार रुपये का हेरफेर हो तो भी 12 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता। जांच टीम इन खातों की जांच करने के बाद ही रिपोर्ट के साथ कार्रवाई के लिए लिखेगी।
खाताधारकों के नाम सामने आने पर बढ़ेगा संकट
सूत्रों ने बताया कि जिस समय के खातों से इन रकम का हेरफेर किया गया था, उन खाताधारकों के परिजनों को खाते में रुपये होने की जानकारी तक नहीं थी। दस से बारह वर्ष तक खातों में वैसे ही रुपये पड़े थे। खातों को जब कागज से कंप्यूटर में दर्ज किया गया था, तो ये खाते सामने आए। अब सवाल है कि क्या जिन खाताधारकों के खाते से रुपये का हेरफेर किया गया, उनके परिजनों को अब वो रकम दी जाएगी? शायद इसी संकट से इन खाताधारकों के परिजन सामने नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अमर उजाला के पास खाताधारकों के नाम और राशि दोनों हैं। लेकिन, इनके असली पते की जानकारी नहीं होने से इनके नाम नहीं लिखे गए हैं।
प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने कहा कि जांच में सभी बिंदुओं को प्रकाश में रखा गया है। अभी जांच चल रही है। हजारों खातों की जांच की गई है, जिससे रुपयों का हेरफेर किया गया। सोमवार को तीन लाख रुपये और उक्त दोनों आरोपी डाककर्मियों ने जमा करवाया है। इनपर मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।
केस 1
डाकघर के एक खाताधारक के खाते से 1 लाख 21 हजार रुपये का हेरफेर किया गया। 2004 में यह खाता खुला था और पांच साल बाद खाता बंद हो गया। जबकि, विभाग के अनुसार इस खाते का संचालन होता रहा। 2018 में इस खाते से एक-दूसरे खाते में इन रुपयों को ट्रांसफर किया गया। इसी खाते से रुपयों के हेरफेर से पूरा मामला खुलकर सामने आया। जांच शुरू हुई तो मामला 50 लाख रुपये से अधिक का हो गया।
केस 2
2003 में एक-दूसरे खाते से 49 हजार रुपये का हेरफेर किया गया था। इस खाते को भी सक्रिय रखते हुए 2017 में दूसरे खाते में रुपये ट्रांसफ र किए गए। ये खाता भी डाक विभाग के एक जानने वाले के नाम से खोला गया था। जांच में ये तथ्य सामने आया है। ऐसे ही एक और खाता 2005 का था। छह वर्ष बाद यह खाता बंद हो गया। लेकिन, इस खाते से रुपये 2019 में दूसरे खाते में भेजे गए।