पुलिस की कोशिश है कि पहले नशीली दवाओं के कारोबार में जुड़े स्थानीय लोगों को दबोचा जाए और इसके बाद फिर जिले से बाहर दायरा बढ़ाया जाए। हालांकि, पुलिस की जांच के दायरे में आगरा और वाराणसी तक के व्यापारी और गिरोह से जुड़े लोगों के नाम सामने आ गए हैं। सभी की भूमिका की जांच अभी पुलिस सर्विलांस की मदद से कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपियों के पकड़े जाने के बाद उनसे पूछताछ में कई और तथ्य सामने आएंगे, जिसके आधार पर जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।
बेखबर थे गोरखपुर के ड्रग अफसर
जांच की पूरी कार्रवाई आगरा और वाराणसी से इनपुट मिलने के बाद की गई। इसके पहले गोरखपुर के ड्रग विभाग के अफसर नशीली दवाओं के धंधे से पूरी तरह से बेखबर बैठे थे। जबकि, यह संभव ही नहीं है कि इतना बड़ा खेल बिना विभागी अफसरों के आंख बंद किए बिना हो जाए। अब अफसरों की गर्दन फंसी है तो वे कार्रवाई में तेजी तो दिखा रहे हैं लेकिन, अब भी उनकी चाल सुस्त ही है। यही वजह है कि सात अगस्त को मामला पकड़े जाने के बाद 14 अगस्त को गोदाम व दुकान को सील करने की कार्रवाई की गई है। इतने दिनों में क्या वहां से नशीली दवाएं इधर-उधर नहीं हुई, यह बड़ा सवाल है?
यह है मामला
ड्रग विभाग ने सात अगस्त को गीडा क्षेत्र के गुप्ता बंधु की दो करोड़ रुपये की खांसी की सिरप बरामद की थी जिसका इस्तेमाल नशे के लिए भी किया जा रहा है। पहले दिन छह लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया गया था। साथ ही संतकबीरनगर जिले में उसी दिन गुप्ता बंधु पर भी एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज किया गया था। अगले दिन आठ अगस्त को गीडा थाना पुलिस ने भी गुप्ता बंधु सहित आगरा के दो दवा कारोबारी भाइयों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद से दोनों भाई फरार चल रहे हैं।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस की तीन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगा दी गईं हैं। सर्विलांस व अन्य माध्यमों की मदद से पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी है। जल्द ही आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर लेगी। इनके पकड़े जाने के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ेगी। गिरोह से जुड़े सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।