फरेंदा कस्बे के मशीनरी की दुकान पर ट्रैक्टर चलित आटा चक्की में विस्फोट के कारण दो जिंदगी काल के गाल में समा गई। घटना में जानकारों द्वारा लापरवाही की बात कही जा रही है। नई आटा चक्की के ट्रायल के दौरान अगल-बगल लोगों के खड़ा होने की मनाही होती है। लेकिन ऐसा न करने से तीन लोगों की जान चली गई।
दीपक के कंधे पर थी परिवार की जिम्मेदारी
ट्रैक्टर चलित आटा चक्की विस्फोट के दौरान लोहरपुरवा निवासी मृतक मिस्त्री दीपक गुप्ता के कंधे पर परिवार संभालने की जिम्मेदारी थी। वह अपनी मां देवंती व पत्नी सोनी व दो बच्चे बेटी देवांशी (2) बेटा ऋषभ (8) माह सहित दो भाइयों के साथ गुजर बसर कर रहा था।
उसकी मौत के बाद पूरे परिवार को रो-रो कर बुरा हाल है। पति के मौत के बाद दहाड़े मार कर रोती हुई पत्नी अपने बच्चो को एकटक निहार रही थी। मां भी बेटे के जाने के गम में बेसुध हो रही थी।