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यूपी: आधार की क्लोनिंग कर रकम उड़ाते थे जालसाज, तीन गिरफ्तार

Tue, 29 Dec 2020 09:26 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में बॉयोमेट्रिक क्लोनिंग के माध्यम से लोगों के खातों से रकम निकालने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह द्वारा एक वर्ष में करीब 83 लाख रुपये की हेराफेरी की जा चुकी है। इनके कब्जे से चार लाख रुपये नकद, स्कॉर्पियो, बाइक, तमंचा, 17 एटीएम और पांच आधार कार्ड आदि बरामद हुआ है। गिरफ्तार सरगना जितेंद्र कुमार चौहान ने पुलिस को बताया कि हेराफेरी की गई रकम में से 32 लाख रुपये से उसने सहजनवां (गोरखपुर) में कपड़े की फैक्ट्री लगा रखी है।
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एसपी हेमराज मीणा ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि जालसाजों की सारी अर्जित संपत्ति जब्त कर गैंगस्टर के तहत इन सभी पर कार्रवाई की जाएगी। एसपी के अनुसार ये लोग एईपीएस प्रणाली (आधार आधारित भुगतान प्रणाली) के माध्यम से लोगों के खाते से धीरे-धीरे रकम निकलते थे। गिरोह के कुछ साथी पिछले दिनों गौर में पकड़े गए थे।

एक जुलाई को प्रेमचंद्र निवासी आवासीय परिसर बाढ़ कार्य खंड प्रथम ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके दो खाते से विभिन्न तिथियों में दस-दस हजार करके 60 हजार रुपये निकल गए। इस मामले में केस दर्ज कर पुलिस जांच कर रही थी।
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फर्जी खाते से करते थे गोलमाल

इसी बीच मुखबिर की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रामपाल यादव, प्रभारी साइबर सेल मजहर खान, प्रभारी सर्विलांस सेल जितेन्द्र सिंह की संयुक्त टीम ने बड़ेबन थाना कोतवाली के एक रेस्टारेंट से रविवार रात गैंग के सरगना जितेंद्र चौहान उर्फ जीतू निवासी बारीगांव थाना सिकरीगंज, आकाश प्रधान निवासी मोहद्दीपुर थाना कैंट जिला-गोरखपुर और भूपेंद्र कुमार चौधरी उर्फ गुड्डू निवासी एकला मिश्रौलिया थाना रुद्रपुर (देवरिया) हाल निवासी जंगल तुलसीपुर बिछिया थाना शाहपुर जनपद गोरखपुर को गिरफ्तार कर लिया।

अभियुक्तों ने बताया गया कि वे लोग सबसे पहले फर्जी आईडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड व मोबाइल नंबर पर विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाकर एटीएम कार्ड प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद जिस शख्स के खाते से रकम निकालनी होती थी उसके अंगुठे की डुप्लीकेट रबर मुहर तैयार कराते थे। आधार कार्ड व पैनकार्ड का प्रयोग करके उनके नाम के सामने एईपीएस ट्रांजेक्शन एप्लीकेशन पर उनके नाम से रजिस्ट्रेशन कर देते थे। उन्हीं के नाम की फर्जी एजेंट आईडी बनाकर इसके सहारे आधार कार्ड और डुप्लीकेट अंगुठे के क्लोन का प्रयोग कर रुपये निकाल लेते थे। 
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