एमएमएमयूटी में तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम शुरू, 65 प्रतिभागियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
गोरखपुर। कमीशन के लालच में बैंक खाता और लॉगिन विवरण दूसरों को देना भारी पड़ सकता है। साइबर अपराधी ऐसे खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन कर पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। बुधवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में शुरू हुए तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। 23 अक्तूबर तक चलने वाले कार्यक्रम में 65 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर और उत्तर प्रदेश पुलिस, गोरखपुर जोन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने सोशल मीडिया अकाउंट की गोपनीयता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अकाउंट और उससे जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति से साझा नहीं करनी चाहिए।
विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ठगी, साइबर स्टॉकिंग और पहचान की चोरी जैसी घटनाएं चुनौती बन रही हैं। सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार एस ने बताया कि साइबर अपराधी कमीशन का लालच देकर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम कई खातों में स्थानांतरित करने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी में बदलने के मामले भी सामने आते हैं।
गोरखपुर जोन के साइबर कमांडो उपेंद्र कुमार सिंह ने अनजान स्रोतों से एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने और मजबूत पासवर्ड रखने की सलाह दी। उन्होंने मोबाइल नंबर, जन्मतिथि और सामान्य शब्दों को पासवर्ड बनाने से बचने को कहा। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विमल कुमार और डॉ. बीके शर्मा ने बताया कि प्रतिभागियों को मोबाइल, डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा तथा गोपनीयता संबंधी सेटिंग्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।