पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू, एसपी साउथ और विधायक पहुंचे
पुलिस ने शाम को तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू करा दी है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही तहसीलदार सुशील कुमार भारतीय, नायब तहसीलदार राकेश शुक्ला, सीईओ अनुज कुमार सिंह और कस्बा चौकी इंचार्ज विकास सिंह भदौरिया समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
एसपी साउथ दिनेश कुमार पुरी ने घटनास्थल पर पहुंचकर हादसे की जानकारी ली। बांसगांव विधायक डॉ. विमलेश पासवान ने भी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। नाग पंचमी पर बच्चे गुड़िया बटोरने के लिए तालाब में गए थे। वहां तीन बच्चे डूब गए। तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई के साथ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।- दिनेश कुमार पुरी, एसपी साउथ
हरीश परिवार का इकलौता बेटा था
नाग पंचमी के उल्लास के बीच बदौली बाबू गांव में हुए हादसे ने तीन परिवारों से उनकी दुनिया छीन ली। तालाब में डूबकर जान गंवाने वाले हरीश, सचिन और अनुज की उम्र भले ही कम थी लेकिन तीनों के घरों ने उनके लिए बड़े सपने संजो रखे थे। कोई परिवार का इकलौता बेटा था तो कोई पढ़-लिखकर आगे बढ़ने की उम्र में था। रोजी-रोटी के लिए पिता घर से दूर थे। उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे के बेहतर भविष्य के लिए वे परदेस में पसीना बहा रहे हैं, एक दिन उसी की मौत की खबर उन्हें दूर देश से मिलेगी।
तीनों की मौत ने बदौली बाबू की खुशियां मातम में बदलीं
राधेश्याम यादव का 11 वर्षीय बेटा हरीश उर्फ करिया अपने परिवार का इकलौता बेटा था। परिजन के मुताबिक, काफी पूजा-पाठ और मन्नतों के बाद हरीश का जन्म हुआ था। उसकी एक बहन शालू है। घर में हरीश सबका दुलारा था। हरीश के पिता राधेश्याम यादव दुबई में नौकरी करते हैं।
परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए वह घर से दूर रहते हैं। परिवार के बड़े पिता शुभकरण यादव बीएसएफ में तैनात थे। उनका निधन हो चुका है। वहीं दूसरे भाई संगम यादव सेना में सेवा दे रहे हैं। ऐसे परिवार में पला हरीश भी अपनों की आंखों का तारा था। उसकी मौत की खबर ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
छठवीं कक्षा के सचिन से थीं परिवार को उम्मीदें
भजुराम का 14 वर्षीय बेटा सचिन कक्षा छह का छात्र था। पढ़ाई के साथ वह अपने परिवार का चहेता था। उसका बड़ा भाई सन्नी करीब 15 वर्ष का है और कक्षा आठ में पढ़ता है। सचिन के पिता सूरत में मजदूरी करते हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पिता घर से दूर मेहनत कर रहे थे। सचिन की मौत की खबर पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे के लिए पिता परदेस में मेहनत कर रहे थे, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।