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Ram Mandir: रात में चलाते थे साइकिल, नदी में डुबो दी जाती थी नाव...आग जलाकर देते थे सिग्नल

Tue, 09 Jan 2024 10:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र शाही राम मंदिर आंदोलन से ऐसे जुड़े कि वह 22 वर्षों तक वकालत से दूर रहे। वह बताते हैं कि जब लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी हुई तो उसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया। अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ उन्होंने गिरफ्तारी दी।
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राम मंदिर बनने की खुशी में आसाम से पैदल अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल होने जाते साधु। - फोटो : राजेश कुमार।
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विस्तार
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 श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन में कारसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। वह लोग दिन भर विश्राम करते और रात में साइकिल चलाते थे। नदी में नाव दिन में डुबाे दी जाती थी और रात को जब वह लोग आग जलाकर सिग्नल देते थे, तब नाव बाहर लाई जाती थी और कारसेवकों को नदी पार कराया जाता था।

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रामजन्म भूमि के उद्धार का नारा देकर भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली थी। 23 अक्तूबर 1990 को जब उनका रथ बिहार के समस्तीपुर पहुंचा तो मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उन्हें गिरफ्तार करा दिया। उसके बाद भाजपा और हिंदू संगठनों में उबाल आ गया। उस आंदोलन में गोरखपुर के कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने घरवालों के रोकने पर भी नहीं माने तो वहीं कुछ लोग महीनों जेल में बंद रहे। कुछ ऐसे भी कार सेवक थे, जो गोरखपुर से साइकिल चलाकर अयोध्या पहुंचे और कारसेवा में शामिल हुए।

आरएसएस के तत्कालीन जिला कार्यवाह बलदेव यादव दो नवंबर 1990 की घटना के चश्मदीद हैं। उन्होंने बताया कि जब 1990 में अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ तो मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अयोध्या में परिंदा पर नहीं मार सकता है। उनकी चुनौती को हमने भी स्वीकार किया था। अयोध्या जाने के लिए 100 कारसेवकों को तैयार किया। 10 -10 की टुकड़ी कारसेवकों की बनाकर वह लोग साइकिल से अयोध्या के लिए रवाना हो गए।
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अयोध्या पहुंचने से पहले दो जत्थे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह लोग दिन भर विश्राम करते और रात में साइकिल चलाते थे। नदी में नाव दिन में डुबा दी जाती थी और रात को जब वह लोग आग जलाकर सिग्नल देते थे, तब नाव बाहर लाई जाती थी और कारसेवकों को नदी पार कराया जाता था। इस तरह से वह लोग अयोध्या हनुमानगढ़ी पहुंच गए। अशोक सिंघल के नेतृत्व में कारसेवक रामजन्म भूमि पर पहुंचे।

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मां और पत्नी ने मना किया पर झूठ बोलकर घर निकल पड़े वीरेंद्र शाही
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र शाही राम मंदिर आंदोलन से ऐसे जुड़े कि वह 22 वर्षों तक वकालत से दूर रहे। वह बताते हैं कि जब लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी हुई तो उसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया। अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ उन्होंने गिरफ्तारी दी। एक महीने तक आजमगढ़ जेल में रहे। उसी बीच दो नवंबर 1990 को जब कारसेवक अयोध्या पहुंचे तो मुलायम सिंह यादव ने उन पर गोलियां चलवा दी। जेल से छूटने के बाद अयोध्या चलने का आह्वान भाजपा की तरफ से हुआ। वह अयोध्या के लिए चले तो उनकी मां और पत्नी रास्ता रोक कर खड़ी हो गईं। लेकिन, वह नहीं माने और मां-पत्नी से झूठ बोलकर घर से निकले और अयोध्या पहुंच गए।

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रामजन्म भूमि आंदोलन में एक महीने जेल में रहे विनोद
पूर्व एमएलसी विनोद पांडेय रामजन्म भूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि जब आडवाणी की गिरफ्तारी हुई तो वह लोग आंदोलन करते हुए गिरफ्तार कर लिए गए। एक महीने तक आजमगढ़ की अस्थायी जेल में रखा गया। वहां से निकलने के बाद वह पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते आंदोलन में सक्रिय रहे। कारसेवकों पर गोली चलने के नाते अयोध्या का नाम लेने से लोग घबरा रहे थे। पार्टी की तरफ से अयोध्या चलने का आह्वान हुआ। घर परिवार की परवाह किए बिना रामकाज में शामिल होने के लिए निकल लिए। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जन्मभूमि तक मार्च निकाला उसमें वह भी शामिल हुए।
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