अयोध्या पहुंचने से पहले दो जत्थे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह लोग दिन भर विश्राम करते और रात में साइकिल चलाते थे। नदी में नाव दिन में डुबा दी जाती थी और रात को जब वह लोग आग जलाकर सिग्नल देते थे, तब नाव बाहर लाई जाती थी और कारसेवकों को नदी पार कराया जाता था। इस तरह से वह लोग अयोध्या हनुमानगढ़ी पहुंच गए। अशोक सिंघल के नेतृत्व में कारसेवक रामजन्म भूमि पर पहुंचे।
इसे भी पढ़ें: टेंपो और ई-रिक्शा से झांसी भेजते थे करोड़ों रुपयों की मूंगफली, टीम ने पांच फर्मों पर मारा छापा
मां और पत्नी ने मना किया पर झूठ बोलकर घर निकल पड़े वीरेंद्र शाही
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र शाही राम मंदिर आंदोलन से ऐसे जुड़े कि वह 22 वर्षों तक वकालत से दूर रहे। वह बताते हैं कि जब लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी हुई तो उसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया। अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ उन्होंने गिरफ्तारी दी। एक महीने तक आजमगढ़ जेल में रहे। उसी बीच दो नवंबर 1990 को जब कारसेवक अयोध्या पहुंचे तो मुलायम सिंह यादव ने उन पर गोलियां चलवा दी। जेल से छूटने के बाद अयोध्या चलने का आह्वान भाजपा की तरफ से हुआ। वह अयोध्या के लिए चले तो उनकी मां और पत्नी रास्ता रोक कर खड़ी हो गईं। लेकिन, वह नहीं माने और मां-पत्नी से झूठ बोलकर घर से निकले और अयोध्या पहुंच गए।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर के शिल्पकार से PM मोदी ने किया संवाद, बोले- आप जैसे कारीगर बहुत जागरूक
रामजन्म भूमि आंदोलन में एक महीने जेल में रहे विनोद
पूर्व एमएलसी विनोद पांडेय रामजन्म भूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि जब आडवाणी की गिरफ्तारी हुई तो वह लोग आंदोलन करते हुए गिरफ्तार कर लिए गए। एक महीने तक आजमगढ़ की अस्थायी जेल में रखा गया। वहां से निकलने के बाद वह पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते आंदोलन में सक्रिय रहे। कारसेवकों पर गोली चलने के नाते अयोध्या का नाम लेने से लोग घबरा रहे थे। पार्टी की तरफ से अयोध्या चलने का आह्वान हुआ। घर परिवार की परवाह किए बिना रामकाज में शामिल होने के लिए निकल लिए। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जन्मभूमि तक मार्च निकाला उसमें वह भी शामिल हुए।