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Gorakhpur News: टेरर फंडिंग और आतंकी संगठनों से गोरखपुर के पहले भी जुड़े हैं तार

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गोरखपुर। टेरर फंडिंग और आतंकी संगठनों से गोरखपुर तार पहले भी जुड़े रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि हिंसक जिहादी कंटेंट के जरिये युवाओं को गुमराह करके कट्टरपंथ की ओर धकेलने की साजिश होती रही है।
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इसी वजह से एनआईए और एटीएस की बुधवार को संयुक्त छापेमारी डिजिटल माध्यमों से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने वाले कथित नेटवर्क पर केंद्रित रही। यह नेटवर्क ऑनलाइन माध्यमों से आईएस और अलकायदा की विचारधारा का प्रचार कर हिंसक जिहाद के लिए युवाओं को प्रभावित करने और भारत विरोधी साजिश को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा था।
बीते पांच वर्षों का रिकार्ड देखें तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी और एटीएस चार मामलों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, कट्टरपंथी नेटवर्क और आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की जांच कर चुकी हैं। कई मामलों में संदिग्धों से पूछताछ, बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई भी की और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
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केस 1
जून 2018 में यूपी एटीएस और महाराष्ट्र पुलिस ने गोरखपुर के सर्वोदय नगर से मास्टरमाइंड रमेश शाह को गिरफ्तार किया था। शाह सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था। वह उनके निर्देश पर फर्जी बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के जरिये सीमा पार से आने वाले फंड का संचालन करता था। आरोपी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में एक करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग पहुंचाने का भी आरोप था।




केस 2
अप्रैल 2022 में गोरखनाथ मंदिर के सुरक्षाकर्मियों पर धारदार हथियार से हमला करने वाले मुर्तजा का तार आईएस और अंसार गजवा-तु-ल जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था। वह नेपाल बॉर्डर के मदरसों के संपर्क में था और विदेशी फंडिंग और स्लीपर सेल बनाने के एंगल से जांच की गई थी।

केस 3
मई 2026 में यूपी एटीएस ने कुशीनगर जिले के रविंद्र नगर थाना क्षेत्र के बेलवा मिश्र निवासी कृष्ण मिश्रा को इसके घर से गिरफ्तार कर लिया था। इसके साथी की गिरफ्तारी के बाद कृष्णा के घर एटीएस पहुंची थी जो पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क के संपर्क में रहकर संवेदनशील ठिकानों और वर्दीधारी व्यक्तियों पर हमले की साजिश रच रहे थे।

केस 4
यूपी एटीएस ने दो अगस्त 2021 को टेरर फंडिंग के मुख्य आरोपी अजय सिंह उर्फ पप्पू उर्फ दिनेश कुमार सिंह को रामगढ़ताल (शिवाजी नगर) इलाके से गिरफ्तार किया था। आरोपी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था। उसके पास से मिले दस्तावेजों से पुष्टि हुई थी कि वह पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के सीधे संपर्क में था। अजय सिंह का नाम पहली बार मार्च 2018 में तब सामने आया था, जब यूपी एटीएस ने गोरखपुर के बलदेव प्लाजा से मोबाइल कारोबारी दो सगे भाइयों अरशद नईम और नसीम अहमद को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद से ही अजय सिंह भाग गया था और नाम व ठिकाने बदल-बदलकर देश के अलग-अलग शहरों में टेरर फंडिंग का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
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