गोरखपुर शनिवार को जब ट्रेन में यात्री के मौत की पुष्टि हुई तो कोच से शव को बाहर निकालने की चुनौती थी। कोरोना संदिग्ध मानकर कोई बोगी में घुसने को तैयार नहीं था। दो घंटे तक मशक्कत चली सबकी हिम्मत जवाब दे गई।
उसके बाद जीआरपी के दो आरक्षी अतुल यादव और रोहित साहनी तैयार हुए। दोनों ने पीपीई किट पहना और कोच में घुस गए। इनके हौसले की तारीफ हर किसी ने की। जब कोच से शव को लेकर बाहर निकले तो सब के चेहरे पर सुकून था।
जीआरपी इंस्पेक्टर आनंद सिंह कहते हैं कि इस टीम पर हमें गर्व है। जान जोखिम में डालकर बोगी में घुसे और अपना कर्तव्य निभाया।
बता दें कि शनिवार को चेन्नई से चलकर गोरखपुर पहुंची श्रमिक स्पेशल में एक यात्री मृत मिला। मृत युवक की पहचान नहीं हो सकी। लोग उसे कोरोना संक्रमित होने की आशंका के चलते ट्रेन की बोगी से उतारने में कतराते रहे। लिहाजा पांच घंटे तक शव कोच में ही पड़ा रहा।
बाद में कोच को एनडीआरएफ की टीम ने सैनिटाइज किया। रात साढ़े आठ बजे जीआरपी ने शव को उतरवाया और मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया, जहां उसका नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया।