फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: सिर्फ खगोल नहीं, सिंधु घाटी की तकनीक भी बताएगी नक्षत्रशाला

Wed, 22 Jul 2026 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला अब सिर्फ खगोलीय अध्ययन का केंद्र नहीं रह जाएगी। यह प्राचीन भारतीय और आधुनिक विज्ञान के संगम के रूप में विकसित की जा रही है। यहां विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम लोगों को हजारों वर्ष पुरानी भारतीय वैज्ञानिक परंपरा से लेकर आधुनिक तकनीक तक की जानकारी एक ही जगह मिलेगी।
विज्ञापन

नक्षत्रशाला में कई मॉडल और प्रदर्शन तैयार किए जा रहे हैं, जो प्राचीन भारतीय सभ्यताओं की वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता को सजीव रूप में प्रस्तुत करेंगे। यहां धातुओं को गलाने वाली पारंपरिक भट्ठियों का प्रदर्शन होगा। इसके जरिए बताया जाएगा कि प्राचीन काल में विभिन्न धातुओं को पिघलाकर औजार, उपकरण और अन्य उपयोगी वस्तुएं कैसे बनाई जाती थीं। यह प्रदर्शन उस वैज्ञानिक समझ का प्रमाण होगा, जिसने भारत की प्राचीन सभ्यताओं को तकनीकी रूप से समृद्ध बनाया।
इसके साथ ही सिंधु घाटी सभ्यता की जीवनशैली और तकनीकी कौशल को भी विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। आगंतुक यहां मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा से बनी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया को देख-समझ सकेंगे। इन प्रदर्शनों से यह स्पष्ट होगा कि हजारों वर्ष पहले भी भारतीय सभ्यताओं में शिल्प, धातुकर्म और निर्माण तकनीकों का उच्च स्तर विकसित था।
विज्ञापन

नक्षत्रशाला में आधुनिक विज्ञान से जुड़े संवादात्मक मॉडल, वैज्ञानिक सिद्धांतों की व्याख्या और खगोल विज्ञान की नवीनतम जानकारियां भी उपलब्ध होंगी। इससे आगंतुकों को प्राचीन और आधुनिक विज्ञान के बीच के संबंध को समझने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देगा। यह विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ ही भारत की वैज्ञानिक विरासत के प्रति गर्व की भावना भी पैदा करेगा। तैयार होने के बाद यह नक्षत्रशाला पूर्वांचल में एक आधुनिक विज्ञान शिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित होगी, जहां ज्ञान, शोध और नवाचार का संगम देखने को मिलेगा।

बोले अधिकारीसुंदरीकरण का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही इसका काम पूरा हो जाएगा। इसका उद्देश्य केवल खगोल विज्ञान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक विरासत और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु तैयार करना है।
विज्ञापन

अभिनव गोपाल, उपाध्यक्ष, जीडीए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें