गोरखपुर। किशोरों और युवाओं में बढ़ती मानसिक परेशानियों के पीछे उनकी भावनाओं को न समझ पाना और सही-गलत का निर्णय लेने में जल्दबाजी जैसे कारण हो सकते हैं। अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की परेशानियों को समझें और समय रहते मदद उपलब्ध कराएं।
यह बातें एम्स के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने कही। वह मोहद्दीपुर स्थित एक होटल में एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकियाट्री के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। रविवार को इसका समापन हो गया।
सम्मेलन की थीम ‘यंग माइंड इन ट्रांजिशन : फ्रॉम अवेयरनेस टू एक्शन’ रही। वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने कहा कि डिजिटल दुनिया, इंटरनेट मीडिया और एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। चिड़चिड़ापन, अकेले रहना और पढ़ाई में रुचि कम होना मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते हैं।
डॉ. विशाल सिन्हा ने कहा कि बच्चों के व्यवहार में बदलाव को केवल जिद या अनुशासनहीनता मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, डॉ. शिखा सेठ ने गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मनोरोगों के सुरक्षित उपचार की जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ. ऋचा त्रिपाठी, डॉ. सामंत सिंह, डॉ. रश्मि शुक्ला, डॉ. महिमा मित्तल और फादर जीजो एंटोनी ने भी विचार रखे। आयोजन सचिव डॉ. अभिनव श्रीवास्तव ने आभार जताया।