- रौशन चौकियां, मॉडल के साथ दफ्ती और थर्माकोल से तैयार किए गए अलम (सद्दे) बने आकर्षण का केंद्र
गोरखपुर। मुहर्रम की चार तारीख से जुलूसों का दौर शुरू हो गया है। अलग-अलग स्थानों से निकाले गए जुलूस में मेहनतकश युवाओं के हुनर की झलक देखने को मिल रही है। हाथों से तैयार की गई रौशन चौकियां, मॉडल के साथ दफ्ती और थर्माकोल से बनाए गए अलम (सद्दे) आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। अलग-अलग डिजाइन में तैयार किए गए यह अलम जुलूसों की चमक रात में और भी खूबसूरत दिख रहे हैं।
बुधवार को सुबह 10:30 बजे जिले में विभिन्न मुहल्लों से जुलूस निकाले गए। इसमें एक से बढ़कर एक मॉडल और रौशन चौकियां देखने को मिलीं। वहीं अलम को देखकर लोगों ने खूब सराहा। कंकड़ की ताजिया मियां बाजार के इमाम चौक से नौशाद खान की अगुवाई में, इस्माइलपुर का सलीम फरजंद, नखास चौक का गुफरान अहमद और अस्करगंज का नवाबुल हसन की निगरानी में जुलूस निकाला गया। यह सभी जुलूस नखास के रास्ते, बक्शीपुर, थवई का पुल, ईदगाह रोड, बेनीगंज चौक, जाफरा बाजार चौक, कर्बला होते हुए घासीकटरा, मर्जापुर, साहबगंज, खूनीपुर, नखास से अपने-अपने इमाम चौकाें की ओर रवाना हुए।
वहीं, रात में 10 बजे निजामपुर से जुलूस निकाला गया जो मिर्जापुर, साहबगंज, खूनीपुर चौक, चौरहिया गोला, एक मिनारा मस्जिद, घासीकटरा के रास्ते वापस निजामपुर पहुंचा। इसी तरह रात करीब दो बजे खूनीपुर शेख झाऊ की मेंहदी का जुलूस शेख शकील अहमद की निगरानी में निकाला गया। यह इमाम चौक से शुरू होकर लालडिग्गी, मदरसा चौराहा, हालसीगंज, घंटाघर, रेती, नखास, इमामबाड़ा पर समाप्त हुआ।
इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी ने खूनीपुर चौराहे पर सभी जुलूसों के मुतवल्लियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान सैयद इरशाद, हाजी सोहराब, शकील शाही, अकरम गोरखपुरी, वसीम इकबाल, मो. अनीस एडवाेकेट आदि मौजूद रहे।
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शाम में इमामबाड़ा से निकला मियां साहब का गश्ती जुलूस
इमामबाड़ा इस्टेट का रवायती गश्ती जुलूस बुधवार की शाम करीब साढ़े सात बजे इमामबाड़ा से निकाला गया। मियां साहब अदनान फर्रुख अली शाह पैरहन पहनकर रवायती अंदाज में अपने पुत्र अयान अली शाह के साथ निकले। सैयद रौशन अली शाह की मजार पर फातिहा पढ़ी। वहां से इमामबाड़ा परिसर में जुलूस के रूप में गश्त की। पश्चिम फाटक से निकलकर इमाम चौक पर फातिहा पढ़ी। इसके बाद गश्त के साथ उत्तर फाटक से इमामबाड़ा परिसर में प्रवेश कर गश्त पूरी की। मर्सिया खान में पहुंचकर जुलूस समाप्त हुआ। इस मौके पर मंजूर आलम, शहाब अहमद, सैयद इरशाद अहमद, समद गुफरान, नेहाल, फरहत आदि मौजूद रहे।