- सर्वर डाउन होने से रजिस्ट्री के लिए इंतजार करते रहे लोग
गोरखपुर। रजिस्ट्री विभाग का सर्वर बुधवार को दिन भर डाउन रहा। इसके चलते रजिस्ट्री कार्य बार-बार प्रभावित होता रहा। शाम चार बजे के बाद स्थिति सुधरी तो भीड़ संभालने के लिए शासन से एक घंटे की अतिरिक्त अनुमति लेनी पड़ी। फिर भी तमाम लोगों को निराश वापस लौटना पड़ा।
सदर के दोनों रजिस्ट्री दफ्तरों को मिलाकर हर दिन 150 से अधिक रजिस्ट्रियां होती हैं। बुधवार को सुबह 10 बजे दफ्तर खुला तो सर्वर डाउन था। इसके चलते रजिस्ट्री शुरू नहीं हो पाई। दोपहर में कुछ देर के लिए स्थिति सुधरी लेकिन जल्द ही फिर दिक्कत आ गई। शाम चार बजे तक चार-पांच रजिस्ट्रियां ही हो पाई थीं। शाम पांच बजे जब सर्वर सही हुआ तो 10 से अधिक लोग इंतजार में थे। इसके बाद शासन से विशेष अनुमति मांगी गई तब जाकर तेजी से काम निपटाया गया। देवरिया से एक जमीन की रजिस्ट्री कराने आईं सुभावती देवी के बैनामा लेखक ने बताया कि सर्वर डाउन होने की वजह से डेढ़ घंटे तक क्रेता-विक्रेता व गवाह बैठे रहे। इस बीच विक्रेता व एक गवाह वापस लौट गए, इस वजह से रजिस्ट्री नहीं हो पाई। अब वे सोमवार को रजिस्ट्री कराएंगे। इंतजार में बैठे रमेश मिश्र, राजेंद्र जायसवाल, द्रौपदी देवी आदि ने देर शाम रजिस्ट्री कराई।
इस संबंध में एआईजी स्टांप संजय दूबे ने बताया कि बुधवार को पूरे दिन सर्वर की गड़बड़ी के चलते दिक्कत आई। देर शाम एक घंटे का अतिरिक्त समय लेकर रजिस्ट्री कराई गई।
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पहले होता है ऑनलाइन आवेदन, फिर होती है रजिस्ट्री
रजिस्ट्री दफ्तर में प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। क्रेता-विक्रेता के बीच सहमति के आधार पर बिक्री से संबंधित अभिलेख तैयार कर सुबह ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद फिर स्टांप ड्यूटी का मिलान, गवाहों के बयान आदि का सत्यापन होता है। इसके बाद अभिलेखों को स्कैन कर रजिस्ट्री के लिए अपलोड किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दो बार सर्वर के ठीक रहने की जरूरत पड़ती है। अगर ऑनलाइन आवेदन नहीं हो पाया तो रजिस्ट्री नहीं होती है। कई बार आवेदन होने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं हो पाती है। बुधवार को बारी-बारी दोनों सर्वर आते-जाते रहे।