गोरखपुर। खोराबार क्षेत्र के मिर्जापुर घाट पर शुक्रवार की सुबह जैसे ही राप्ती नदी से तीन किशोरों के शव बाहर निकाले गए, वहां मौजूद परिजनों का सब्र टूट गया। चीख-पुकार से पूरा घाट कांप उठा। कोई अपने बेटे को सीने से लगाने के लिए दौड़ पड़ा तो कोई बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। इस दर्दनाक मंजर को देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों में कोई डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था तो कोई यूट्यूबर बनकर घर की किस्मत बदलना चाहता था।
घटना बुधवार दोपहर की है, जब कैंट थाना क्षेत्र के रानीडीहा शिवमंदिर टोला निवासी अमन उर्फ बीरू राजभर (15), मालवीय नगर निवासी विवेक निषाद (15), जंगल सिकरी निवासी गगन पासवान (15) और रानीडीहा निवासी अनिकेत यादव (13) अपने साथी राजकरन उर्फ टाइमपास समेत नौ बच्चे घर से 13 किमी दूर साइकिल से मिर्जापुर गांव के पास बने पीपा पुल पर पहुंचे थे। वहां आठ बच्चे पुल से कूदकर नदी में नहाने लगे।
इसी दौरान अचानक अमन उर्फ बीरू, विवेक, गगन और अनिकेत गहरे पानी में चले गए और डूब गए। बाकी बच्चे किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले। सूचना मिलने पर पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाश अभियान शुरू किया गया। बृहस्पतिवार शाम को विवेक का शव बरामद हुआ, जबकि शुक्रवार सुबह करीब सात बजे तीन अन्य किशोरों अमन, गगन और अनिकेत के शव भी नदी से खोज निकाले गए।
पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया। बच्चों के राप्ती नदी में डूबने के बाद से तीनों के घर में तीन दिन से चूल्हे नहीं जले। हर घर में मातम पसरा हुआ है। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया तो किसी ने अपने सपनों का सहारा।
डबडबाती आंखों से जीवित बचे टाइमपास ने बताया कि विवेक व विपिन ने घटना के दिन नहाने की योजना बनाई थी। सभी दोस्त दोपहर एक बजे एकत्रित हुए इसके बाद वह पहली बार वहां नहाने गए थे। अचानक गहराई में जाने के कारण वे डूबने लगे। उसने बताया कि घटनास्थल के पास मछली पकड़ रहे एक बाबा ने किसी तरह उसे पानी से बाहर निकाला, जिसके बाद वह डरकर वहां से भाग गया। वह बहुत डरा हुआ था और वहां से भागकर चिड़ियाघर के पास भारत माता के मूर्ति के पास जाकर सो गया। जब वह जगा तो शाम को घर आया और तब उसको लेकर लोग घाट पर गए और उसने बताया कि कौन-कौन डूबा है।
उसने बताया कि विपिन भैरोपुर में किराए पर रहता है, बाकी चार लड़कों को वह नहीं जानता है। उसने बताया कि 10 दिन पहले सभी की दोस्ती हुई थी और पहली बार वहां गए थे ।
बच्चों के सपनों को याद कर परिजनों के छलके आंसू
बच्चों के अधूरे सपने अब परिवारों की आंखों में आंसू बनकर रह गए हैं। विवेक निषाद के बाबा ओमप्रकाश ने बताया कि उनका परिवार बहुत गरीब है। विवेक को यूट्यूब पर रील बनाने का शौक था और वह अक्सर कहता था कि एक दिन वह बड़ा यूट्यूबर बनकर घर की माली हालत बदलेगा। उसकी मेहनत रंग लाने ही वाली थी, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने उसे छीन लिया।
वहीं, अनिकेत यादव पढ़ाई में काफी होनहार था। उसके पिता घनश्याम यादव ने बताया कि वह बड़ा अफसर बनने का सपना देखता था। परिवार ने उसे पढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सबसे छोटा गगन पासवान भी अपने परिवार के लिए बड़े सपने देखता था। उसके पिता ने बताया कि वह कहता था कि बड़ा होकर खूब मेहनत करेगा और घर की गरीबी दूर करेगा। अब उसके जाने के बाद मां चंद्रावती का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।
घाट से लेकर पोस्टमार्टम तक मची रही चीख-पुकार
घाट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक हर जगह सिर्फ चीख-पुकार और मातम का माहौल रहा। एक साथ चार मासूम जिंदगियों के बुझ जाने से पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव जब गांव लाए गए तो वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई।