गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय संगोष्ठी में सोमवार को भारतीय संस्कृति व गो सेवा विषय पर संतों और विद्वानों ने विचार रखे। मुख्य अतिथि स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने कहा कि गो सेवा से प्रकृति, संस्कृति और मानव जीवन की रक्षा संभव है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य ने भगवान की सुंदर प्रकृति को विषैला बनाया है। स्थूल के साथ सूक्ष्म प्रकृति की रक्षा भी जरूरी है और गो माता दोनों की रक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र को खेतों में डालने से ऊसर भूमि को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। संपूर्ण वैदिक, ऋषि और देव संस्कृति के साथ प्रकृति-पर्यावरण का मूल गो माता हैं। गो रक्षा धर्म की रक्षा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में गो मंत्रालय बनाए जाने की भी बात कही।
- घर-घर गो सेवा से मिलेगा जहर मुक्त भोजन : श्याम बिहारी गुप्ता
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि जहर मुक्त भोजन और पर्यावरण संरक्षण के लिए घर-घर गो सेवा को बढ़ावा देना जरूरी है। खेती में रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से भोजन प्रभावित हो रहा है। गोबर को खेतों तक पहुंचाने से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने गोबर गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात भी कही।
- गो रक्षा और भारतीय संस्कृति की रक्षा कर रही गोरक्षपीठ : विद्या चैतन्य
नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य ने कहा कि गोरक्षपीठ महंत दिग्विजयनाथ के समय से गो रक्षा और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए काम करती रही है। वर्तमान में भी गोरक्षपीठाधीश्वर के नेतृत्व में गो रक्षा और संस्कृति संरक्षण का कार्य आगे बढ़ रहा है।
- गो माता के बिना गंगा का धरती पर आना संभव नहीं : बाल भरतदास
अयोध्या से आए स्वामी बाल भरतदास ने कहा कि गो माता के बिना गंगा का धरती पर आना संभव नहीं होता। सूर्यवंशी राजाओं के जीवन में गो सेवा का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने गो वध पर रोक की आवश्यकता पर भी विचार रखे।
-गो माता का सूर्य की किरणों से संबंध : प्रो. कमलनाथ
शृंगेरी मठ, कर्नाटक के प्रो. कमलनाथ ने कहा कि गो माता का सूर्य की किरणों से विशेष संबंध माना गया है। उन्होंने गो दूध और गव्य पदार्थों के उपयोग से स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि के अवसरों की चर्चा की।
- गो माता के दर्शन से मिलता है पुण्य : लालमणि त्रिपाठी
गीताप्रेस के प्रबंधक लालमणि त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को सामान्य पशु नहीं बल्कि देवताओं के स्वरूप के रूप में माना गया है। गो माता के दर्शन, स्पर्श और चरण वंदन को पुण्यकारी बताया गया है।
- वेदों ने गाय को विश्व की माता कहा : अतुल सिंह
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष अतुल सिंह ने कहा कि वेदों में गाय को विश्व की माता कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण की कथा गो सेवा के बिना अधूरी है। भारतीय संस्कृति में गाय को गोधन कहा गया है और उससे प्राप्त प्रत्येक पदार्थ को महत्वपूर्ण माना गया है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता गोरक्षपीठ के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने की। वैदिक मंगलाचरण डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने किया और संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया। इस अवसर पर अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे।