गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक दिन के नवजात की जटिल सर्जरी कर चिकित्सकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। जन्मजात विकृति के कारण शिशु का मल मार्ग विकसित नहीं हुआ था, जिससे उसकी स्थिति गंभीर होती जा रही थी। समय रहते किए गए ऑपरेशन से नवजात को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है।
जानकारी के अनुसार, शिशु का जन्म एक निजी अस्पताल में हुआ था लेकिन जन्म के बाद ही स्पष्ट हो गया कि उसके शरीर में मल त्याग का प्राकृतिक छिद्र नहीं है। साथ ही उसका मूत्र मार्ग भी सामान्य स्थान पर न होकर अंडकोष के मध्य खुल रहा था, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।
एम्स के जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद नवजात का पेट फूलने लगा और वह मल त्याग नहीं कर पा रहा था। ऐसे में परिजनों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए एम्स प्रशासन ने तुरंत इलाज की जिम्मेदारी संभाली। डॉ. अंचला भारद्वाज की देखरेख में नवजात को एनआईसीयू में भर्ती किया गया। 12 घंटे के भीतर सभी जरूरी जांचें पूरी कर उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। शिशु का वजन केवल 1500 ग्राम था, जिससे सर्जरी और एनेस्थीसिया दोनों ही अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे।
एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका द्विवेदी, विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. विजेता बाजपेयी और डॉ. रविशंकर की टीम ने नवजात को सुरक्षित रूप से बेहोश कर सर्जरी संभव बनाई।