सबसे पहले पुलिस के पास लेकर गया था मांग पत्र
विनोद सबसे पहले मांग पत्र लेकर पैडलेगंज चौकी पर गया था। विनोद का कहना है कि वहां पुलिसकर्मियों ने प्रार्थना पत्र पढ़ा और उसे गंभीरता से नहीं लिया। आपस में बातचीत करने लगे कि ये भारत रत्न क्या होता है। बकौल विनोद- मैं समझ गया कि मेरी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद मैं कमिश्नर के पास गया। वहां पर भी मेरी बात अनसुनी की गई, लेकिन फिर मांग पत्र देने को कहा गया।
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एक्सपर्ट कमेंट
बीआरडी मेडिकल कॉलेज मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ तापस कुमार आईच ने कहा कि यह एक विशिष्ट केस है। पहले तो इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का परीक्षण कर यह पता लगाना होगा कि वह जान बूझकर झूठ तो नहीं बोल रहा। इसके बाद किसी मनोविज्ञानी से केस स्टडी कराना होगा। तब जाकर पता लगेगा कि यह मानसिक रोग या जान बूझकर किया गया कृत्य है।