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नगर निगम : भूमाफिया को समाजवादी पार्टी का बताने पर भड़के पार्षद, हंगामा

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सदन में 1878 करोड़ के बजट को मिली मंजूरी, पार्षद वरीयता एक करोड़ करने की उठी मांग
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गोरखपुर। नगर निगम बोर्ड की 17वीं बैठक बृहस्पतिवार को मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस दौरान एक भाजपा पार्षद ने निगम की जमीन पर समाजवादी पार्टी से जुड़े भूमाफिया के कब्जे का आरोप लगाया तो हंगामा शुरू हो गया। सपा पार्षदों ने इस पर जबरदस्त विरोध जताया। मेयर और वरिष्ठ सदस्यों के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हुई। हो-हल्ला के बीच 1878 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे बड़े बजट को मंजूरी दी गई।
नगर आयुक्त ने कहा कि बजट का आकार अब कई बड़े नगर निगमों से भी अधिक हो गया है। आगरा का बजट 1600 करोड़ रुपये है जिससे गोरखपुर का अधिक हो गया है। बजट पारित होते ही सदन में मेज थपथपाकर स्वागत किया गया।
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बोर्ड बैठक में धर्मशाला के पार्षद छठीलाल गुप्ता ने नगर निगम की जमीन पर कब्जे का आरोप लगाते हुए सपा का नाम लिया। यह सुनते ही विपक्षी पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया। यह तय हुआ कि अतिक्रमण के मामलों में राजनीतिक आरोपों के बजाय तथ्य और साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मेयर काफी देर तक चुप बैठे रहे। पार्षद वरीयता बढ़ाने की मांग को लेकर बहस करते रहे लेकिन मेयर ने कुछ नहीं बोला, जबकि नगर आयुक्त जवाब देते रहे। इस पर पार्षद सहाब अंसारी ने तंज कसते हुए कहा-महापौर जी! आप भी मुख खोल दीजिए। मेयर ने जवाब दिया-मैं कुछ बोला तो सब उल्टा हो जाएगा।
निगम को मिले भवन नक्शा स्वीकृति का अधिकार
सदन में पार्षदों ने भवन नक्शा स्वीकृति का अधिकार नगर निगम को सौंपने की मांग जोरदार तरीके से उठाई। फिलहाल यह प्रक्रिया गोरखपुर विकास प्राधिकरण के पास है। पार्षदों का तर्क था कि नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के बाद विकास की जिम्मेदारी निगम पर है, तो नक्शा पास करने का अधिकार भी उसी को मिलना चाहिए। बैठक में मौजूद ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने घोषणा की कि प्रत्येक पार्षद को अपने वार्ड में विकास कार्यों के लिए 70-70 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति होगी। अब तक पार्षद वरीयता 55 लाख और अन्य कार्यों के लिए पांच लाख थी। साथ ही उन्होंने प्रोत्साहन स्वरूप यह भी कहा कि यदि स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर देश में प्रथम स्थान प्राप्त करता है तो सभी पार्षदों को 30-30 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।
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पार्षद निधि और भत्ते पर बहस
बैठक में कई पार्षदों ने पार्षद निधि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने की मांग की। उनका कहना था कि तेजी से बढ़ती आबादी और वार्डों के विस्तार को देखते हुए 70 लाख रुपये भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बन सकी। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि निधि 60 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये की जा चुकी है और स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल आने पर अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

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सड़क-नाली और सीवरेज का होगा ज्यादा काम, लाइटें भी होंगी चकाचक
- सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए 821 करोड़ रुपये मंंजूर, पिछले साल से 83 करोड़ अधिक

गोरखपुर। शहर की सड़कों, नालियों और सीवरेज पर इस साल ज्यादा काम होगा। इसके अलावा मुख्य सड़कों के अलावा मोहल्लों की रोशनी भी चकाचक रहेगी। निगम की बोर्ड बैठक में बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा निवेश किया गया है। इस वर्ष सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए 821 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले साल से 83 करोड़ अधिक है।
इसके अलावा सड़क, नाली, सामुदायिक भवन और अन्य ढांचागत परियोजनाओं को गति देने की योजना है। जलापूर्ति एवं सीवरेज मद में 81.3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। पथ प्रकाश व्यवस्था के बजट को भी 18 करोड़ से बढ़ाकर 48 करोड़ रुपये कर दिया गया है, ताकि शहर की सड़कों और मोहल्लों में बेहतर रोशनी सुनिश्चित की जा सके।



संपत्ति कर पर 15 प्रतिशत तक की छूट
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संपत्ति कर संग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। निर्णय के अनुसार, एक अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक डिजिटल/ऑनलाइन कैशलेस भुगतान करने पर करदाताओं को 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जबकि अन्य माध्यमों से भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। इसके बाद एक जुलाई 2026 से 31 अगस्त 2026 तक डिजिटल/ऑनलाइन कैशलेस भुगतान पर 12 और अन्य माध्यम से भुगतान पर आठ प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। बैठक में ''''गोरखपुर नगर निगम (निर्धारण सूची में संशोधन और परिवर्तन) उपविधि-2025'''' को भी सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे कर निर्धारण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके साथ ही बंधू सिंह मल्टीलेवल पार्किंग में पुराने दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें आवंटित करने का निर्णय लिया गया।


पार्षद को नहीं दी बैठक की सूचना
शिवजीनगर वार्ड के पार्षद सौरभ विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि सदन की बैठक से पहले उनको सूचना नहीं दी गई। शाम को बैठक समाप्त होने के बाद उनको इसकी जानकारी हुई। आरोप लगाया कि न ही कोई मैसेज मिला न ही कोई पत्र। शाम को उन्होंने मेयर से बात कर आपत्ति दर्ज कराई।
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दो कर्मचारियों पर वसूली का आरोप
वार्ड नंबर 34 विश्वकर्मापुरम-बौलिया के पार्षद मनोज त्रिपाठी ने निगम के दो कर्मचारियों पर वसूली का आरोप लगाया। इस पर नगर आयुक्त ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
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