- नकली पैकेट में भरकर सादा नमक व मिलावटी चाय पत्ती बेच रहे धंधेबाज
- नेपाल, बिहार के साथ आसपास के जिलों व ग्रामीण क्षेत्रों में खपा रहे माल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। चाय की चुस्की आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। धंधेबाजों ने चायपत्ती में भी मिलावट कर दी है। धंधेबाज इस्तेमाल की गई पुरानी चायपत्ती में लकड़ी का बुरादा और चावल की भूसी मिलाकर ताजा दिखाने के लिए उसमें कृत्रिम डाई मिला रहे हैं। इसी तरह रोड़ा वाले नमक को पीसकर उसे असली की तरह दिखने वाले नकली पैकेट में आसपास के जिलों में खपा रहे हैं। इसके लगातार सेवन से लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है और लंबे समय तक खाने से कैंसर का भी खतरा रहता है।
टाटा कंपनी के अधिकारी के साथ पुलिस ने खोराबार के जंगल सिकरी और सूबा बाजार में दो दुकानों से टाटा कंपनी की नकली चायपत्ती और नमक के पैकेट पकड़े। पैकेट हूबहू असली की तरह था। अब नमूना लेकर प्रयोगशाला भेजा गया है। सितंबर में मिर्जापुर इलाके में लवकुश की दुकान से नकली चाय पत्ती पकड़ी गई थी, जिसमें मिलावट की पुष्टि हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, धंधेबाज दिल्ली से ब्रांडेड कंपनियों की चायपत्ती और नमक का रैपर मंगाते हैं और उसमें मिलावटी भरकर बेच देते हैं। इसमें मोटा मुनाफा होता है। नकली नमक में आयोडीन की मात्रा जानबूझकर कम रखी जाती है, ताकि लागत घटे और मुनाफा बढ़े। एक क्विंटल नकली नमक की बिक्री में करीब 700 से 800 रुपये की कमाई होती है।
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टॉयलेट क्लीनर भी मिलावटी
टॉयलेट क्लीनर हार्पिक भी मिलावटी बिक रहा है। धंधेबाज एक लीटर नकली क्लीनर में 20 से 30 रुपये का मुनाफा कमाते हैं। कंपनी के विशेषज्ञों का कहना है कि सील, बैच नंबर, गाढ़ापन और गंध व तरलता से इसे पहचाना जा सकता है।
कोट
मिलावटी चायपत्ती और नमक खाने से पेट संबंधी बीमारियां, कमजोरी और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकतीं हैं। इसके लंबे समय तक सेवन से कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
- डॉ. बीके सुमन, फिजिशियन, जिला अस्पताल
कोट
शहर में ब्रांडेड कंपनी के नाम पर नकली उत्पाद नमक, चायपत्ती आदि बिकने की जानकारी हुई है। जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिक भी सूचना दे सकते हैं।
- डॉ. सुधीर सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
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