गोरखपुर। संत हनुमान प्रसाद पोद्दार की तपोभूमि गीतावाटिका में रविवार को श्रीमद्भागवत पाठ हुआ। इसमें दशम स्कंध के पांचवें अध्याय से 54वें अध्याय तक का पाठ किया गया। इस दौरान कृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन हुआ।
वृंदावन से आए आचार्य योगेंद्र मिश्र सहित 132 विद्वान पुरोहितों ने श्लोकात्मक पाठ किया। गीतावाटिका कृष्णाय वासुदेवाय देवकी नंदनाय च के उद्घोष से गूंजती रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंडाल में भक्तिभाव से परिक्रमा की। देश-विदेश के भक्त डिजिटल माध्यम से भी इस पाठ से जुड़ रहे हैं।
कृष्ण की प्रमुख लीलाओं को बताया गया कि बाल कृष्ण ने पूतना और तृणावर्त जैसे असुरों का वध कर गोकुल की रक्षा की। उन्होंने यमलार्जुन वृक्ष गिराकर नलकूबर और मणिग्रीव का उद्धार किया। श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को यमुना छोड़ने पर विवश किया और गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक उठाया। इंद्र को क्षमा मांगनी पड़ी और उन्होंने श्रीकृष्ण को ''''''''गोविंद'''''''' नाम दिया। मथुरा में कंस का वध कर उन्होंने देवकी और उग्रसेन को मुक्त कराया।