गोरखपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के 63वें वार्षिक प्रांतीय महाधिवेशन के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को नई शिक्षा नीति, शिक्षकों की समस्याओं और संघर्ष के मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि नई शिक्षा नीति समग्र शिक्षा का दस्तावेज है। शिक्षा नेतृत्व देने का काम करती है और शिक्षकों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
रेलवे ऑडिटोरियम में चल रहे कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। शिक्षक की गरिमा के लिए संघर्ष जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. अजय शुक्ल ने कहा कि शिक्षा ब्लैक बोर्ड से स्मार्ट बोर्ड की तरफ बढ़ गई है, इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह सम्मेलन शिक्षा के महत्वपूर्ण आयामों पर मंथन कर ज्ञान का अमृत प्रदान करने में सफल रहा। शिक्षक का स्तर मां का होता है। अपने छात्र के प्रति उनका जीवन समर्पित होता है। शिक्षक का कार्य राष्ट्र निर्माण का होता है। शिक्षकों के अधिकारों के प्रति सरकार को संवेदनशील होना चाहिए।
संघ के प्रांतीय मुख्य संरक्षक जगदीश पांडेय ठुकराई ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वो हर छात्र को अपना बच्चा समझकर शिक्षा दे। सम्मेलन को डॉ. राम ललित सिंह, सुधाकर त्रिपाठी, डीएन यादव, अरुण पाल, आत्रेय आरएन गुप्ता, जगतारण शरण, वाचस्पति शुक्ल, डॉ. महानंद द्विवेदी, देवेंद्र प्रताप गौतम, डॉ. अजय पांडेय, कैप्टन जितेंद्र सिंह व नवनाथ दुबे आदि ने भी संबोधित किया।