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Gorakhpur News: आरोपी के घर शव रखकर ढाई घंटे तक हंगामा, पुलिस के छूटे पसीने

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शव से लिपटकर रोती मां व परिजन। संवाद
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पिपराइच छात्र हत्याकांड: आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हनुमान मंदिर चौक पर हाटा-सोनबरसा मार्ग जाम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पिपराइच थाना क्षेत्र में कक्षा 11 के छात्र सुधीर उर्फ भोला की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद शुक्रवार को इलाके में तनाव फैल गया। वारदात से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव को लेकर मुख्य आरोपी छोटू उर्फ दयानंद के घर पहुंच गए और वहीं शव रखकर हंगामा शुरू कर दिया। करीब ढाई घंटे तक हालात बेकाबू रहे। पुलिस को लोगों को समझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
हंगामे के दौरान स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब गुस्साए एक युवक ने पुलिस की गाड़ी के आगे लेटकर विरोध जताया। भीड़ की मांग साफ थी, हत्यारोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई। मौके पर मौजूद अधिकारी लगातार समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन लोग किसी भी कीमत पर हटने को तैयार नहीं थे। सूचना पर एसएसपी राजकरन नय्यर मौके पर पहुंचे।
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उन्हें देखते ही मृतक छात्र की मां राजकुमारी फूट-फूटकर रो पड़ीं और उनके पैरों पर गिर गईं। रोते हुए उन्होंने कहा कि साहब, जान के बदले जान चाहिए। एसएसपी ने उन्हें संभाला और भरोसा दिलाया कि आरोपियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
करीब ढाई घंटे की मान-मनौव्वल और अधिकारियों के आश्वासन के बाद पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज सकी। परिजन भी साथ गए और उनकी मौजूदगी में थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो सकी। हालांकि एहतियात के तौर पर गांव और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

इंस्टाग्राम स्टेट्स पर चल रही थी धमकियों की जंग
घटना से करीब पांच दिन पहले सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो चुका था। इंस्टाग्राम पर एक लड़की के फोटो को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी दी गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से स्टेट्स के जरिये देख लेने की धमकियां दी जाती रहीं। गांव और आसपास के लोगों ने इसे युवाओं का आपसी विवाद मानकर नजरअंदाज कर दिया। किसी ने गंभीरता से हस्तक्षेप नहीं किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि विवाद बढ़ता गया और आखिरकार छात्र की हत्या हो गई। इंस्टाग्राम पर रील को लेकर लगातार बवाल चल रहा था। शुक्रवार सुबह जो स्टेट्स सुधीर ने डाला वही हत्या का कारण बन गया।

सुबह पंचायत हुई, दोपहर में हो गई हत्या
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे इलाके के रहने वाले राहुल नाम के शख्स की पहल पर दोनों पक्षों के बीच पंचायत कराई गई थी। पंचायत में यह कहकर मामला शांत कराने की कोशिश की गई कि सभी एक ही गांव के हैं। पंचायत के बाद लोगों को लगा कि विवाद खत्म हो गया है। लेकिन दोपहर होते-होते हालात फिर बिगड़ गए और दोपहर में छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पंचायत के बावजूद हुई हत्या से गांव में आक्रोश और गहरा गया।



डीएम को बुलाने की जिद पर अड़े थे ग्रामीण
शाम करीब चार बजे के बाद भी ग्रामीणों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ। हनुमान मंदिर चौक पर हाटा और सोनबरसा मार्ग को करीब एक घंटे तक जाम कर दिया गया। इसके बाद लोग रामलीला मैदान में शव रखकर जिलाधिकारी को बुलाने की मांग पर अड़ गए। मौके पर कई थानों की पुलिस, सीओ, एसएसपी, एलआईयू और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात रही। प्रशासन के अफसरों के समझाने-बुझाने के बाद देर शाम जाम खुल सका।

मां की डांट, बेटे की चुप्पी और टूट गया परिवार
सुधीर उर्फ भोला की मौत ने एक गरीब परिवार की आखिरी उम्मीद भी छीन ली। गढ़वा उर्फ मुंडेरी गांव निवासी सुधीर की मां राजकुमारी गोरखपुर स्थित अनाथ आश्रम में काम कर परिवार का पेट पालती हैं। बड़ा भाई अजित बाहर कारपेंटर का काम करता है। परिवार के लिए सुधीर भविष्य की उम्मीद था। राजकुमारी ने रोते हुए बताया कि दो-तीन दिन पहले गांव के छोटू से सुधीर की कहासुनी हुई थी। उस दिन वह बेटे को डांटकर घर ले आई थीं। समझाया था कि झगड़ालू किस्म के लोगों से दूर रहा करो। मां ने बताया- मैंने कहा था बेटा, उनसे बात मत किया करो। वे लोग ठीक नहीं हैं। बेटे ने मेरी बात मान ली थी और घर में चला गया था, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने उसे मार डाला। सुधीर की मां बार-बार यही कहती रहीं थी कि मेरा बेटा तो किसी से झगड़ा नहीं चाहता था, फिर उसे क्यों मार दिया।


असलहा लहराते भागे आरोपी, बेटे का शव देख मां हो गई बेसुध

सुधीर को गोली लगते ही वहां मौजूद छात्रों ने शोर मचाया। कॉलेज से अन्य छात्र दौड़ते हुए आए। बदमाश असलहा लहराते हुए भाग गए। खून से लथपथ सुधीर के जख्म को दोस्तों ने कपड़े से बांधा, कंधे पर उठाया और अस्पताल ले जाने की कोशिश की। रास्ते में उसे बाइक पर लिटाकर अस्पताल के लिए निकले, लेकिन कुछ ही दूर पर उसकी सांसें थम गईं। जब परिजन मौके पर पहुंचे तो बेटे का शव देखकर मां बेसुध हो गईं। इसके बाद गुस्साए लोग शव लेकर आरोपी के घर पहुंच गए। वहां आरोपी के मां-बाप भीड़ के हत्थे चढ़ गए और उनकी पिटाई शुरू हो गई। किसी तरह पुलिस ने उन्हें बचाकर अपनी जीप में बैठाया, लेकिन भीड़ पुलिस वाहन के आगे लेट गई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस शव को कब्जे में ले सकी।
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पुलिस ने शव को छीना तो पुलिस से हुई नोकझोंक
परिवार को समझाने के बाद पुलिस ने रोते-बिलखते परिजनों से शव छीन लिया। इससे आक्रोशित लोगों और पुलिस में नोकझोंक भी हुई। हालांकि एसएसपी ने जब परिजनों को समझाया कि अगर आप लोग हमारी बात नहीं मानेंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को अपना काम करने दिया जाए।
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