बांसगांव इलाके में शिक्षिका ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मंगवाया था सल्फास
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जहां एक ओर फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और खानपान की सुविधा लोगों तक पहुंचा रहे हैं, वहीं इन पर प्रतिबंधित और जानलेवा सामान की उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। ताजा मामला बांसगांव क्षेत्र से सामने आया है। वहां एक शिक्षिका ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सल्फास मंगवाया था। यह वही सल्फास है, जिसकी बिक्री पर प्रतिबंध है।
कृषि कार्यों में उपयोग होने वाला सल्फास (एल्युमिनियम फॉस्फाइड) अत्यंत जहरीला रसायन है। इसके खुले बाजार में बिक्री पर रोक है और केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं को सीमित शर्तों के साथ ही बेचने की अनुमति है। बावजूद इसके यह जहर अब डिजिटल बाजार में भी धड़ल्ले से उपलब्ध हो रहा है। यह न सिर्फ कानून की अवहेलना है बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। बांसगांव की घटना ने इस पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षिका ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सल्फास ऑर्डर किया था, जो आसानी से उसके घर तक पहुंच गया। न तो खरीदार की पहचान की गहन जांच हुई और न ही यह देखा गया कि इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा। घर पर भी लोग इसे समझ नहीं पाए कि पैकेट में क्या आया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रसायनों की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त निगरानी की जरूरत है। मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद या अन्य कारणों से लोग ऐसे जहरीले पदार्थों का गलत उपयोग कर सकते हैं, जिससे आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है। पहले जहां ऐसे जहर को हासिल करना कठिन था, अब मोबाइल फोन के जरिये कुछ ही क्लिक में यह घर तक पहुंच जा रहा है।
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है कि कैसे युवती ने सल्फास मंगवाया है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।