- रंग महोत्सव के अंतिम दिन समागम रंगमंडल जबलपुर ने दी नाट्य प्रस्तुति
- महाभारत के वनपर्व पर आधारित नाटक से उस काल में होने का हुआ अहसास
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अभियान थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित पांच दिवसीय रंग महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के मंच पर जबलपुर के समागम रंगमंडल के कलाकारों ने नाटक ''''''''भूमि'''''''' की प्रस्तुति दी। प्रयोगधर्मी लेखक आशीष पाठक के लिखे और एनएसडी प्रशिक्षित स्वाति दुबे की ओर से निर्देशित नाटक से दर्शकों को जमीन के लिए संघर्ष विराम की सीख मिली। महाभारत के वनपर्व की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक को देखकर दर्शकों को कुछ समय के लिए उस काल में रहने का अहसास हुआ।
नाटक की शुरुआत कांगड़ा के महाराज प्रभंजन से हुई और चित्रांगदा के जन्म तक पहुंची। अर्जुन महाभारत के पूर्व मित्रता यात्रा पर निकले हुए है जो नाग लोक से होते हुए कांगड़ा की भूमि पर पहुंचते हैं। जहां उनकी भेंट चित्रांगदा से होती है। यह भेंट नायक-नायिका की तरह न होकर दो योद्धाओं की तरह होती है। दोनों का विवाह होता है पर महाभारत के चलते अर्जुन को वापस लौटना पड़ता है, वह भी बिना चित्रांगदा के। चित्रांगदा पुत्र को जन्म देती है। अर्जुन की वापसी 20 वर्ष बाद अश्वमेध यज्ञ के घोड़े के साथ होती है, जिसे उनका पुत्र बभुवाहन पकड़ लेता है। फिर तीन योद्धा आमने-सामने होते हैं। भूमि को लेकर इस संघर्ष के जरिये लेखक व निर्देशक दर्शकों को यह संदेश देने में सफल रहे कि मनुष्य महाभारत काल से भूमि के लिए लड़ रहा है। इससे नुकसान हुआ है, बावजूद इसके भूमि पर वर्चस्व के लिए जंग जारी है।
चित्रांगदा की भूमिका में खुद निर्देशक स्वाति दुबे और अर्जुन की भूमिका में हर्षित सिंह ने अपने बेजोड़ अभिनय से दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी। अंकित कुमार, शिवांजलि, साक्षी दुबे, मानसी रावत, अंकित कुमार, साक्षी गुप्ता का अभिनय भी खूब सराहा गया।
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बिना रंगमंच के नाटक प्रमाणित नहीं हो सकता: प्रो. सुरेंद्र दुबे
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गोरखपुर। रंग महोत्सव के पांचवें दिन समापन समारोह को संबोधित करते हुए साहित्यकार डॉ. वेद प्रकाश पांडेय ने कहा कि हमारा शहर प्रेक्षागृह के लिए जूझ रहा था, बड़ी दिक्कतें थीं, नाट्य संस्थाएं थी, कलाकार थे और प्रेक्षागृह नदारद। इस संबंध में 15 कलाकारों की टीम लेकर मुख्यमंत्री से मिला। परिणाम स्वरूप शहरवासियों के लिए प्रेक्षागृह मिल गया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा यह सौभाग्य है कि गोरखपुर में सदृश्य दर्शकों से भरा हुआ यह हाॅल है। गोरखपुर सदैव इस दिशा में समृद्ध रहा है। अनेक संस्थाएं नाटक करने में सक्रिय हैं। अभियान ने गोरखपुर की सांस्कृतिक कला को नवजीवन दिया है।
श्री दुबे ने कहा एनएसडी की ओर से 24 महोत्सव होने जा रहा है। इस 24 महोत्सव में गोरखपुर की टीम भी हिस्सा ले और जो गोरखपुर में अन्य नाट्य संस्थाओं को सम्मान मिला हैं वही सम्मान एनएसडी के महोत्सव में भी मिले। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. चारुशीला सिंह ने किया। इस अवसर पर अतिथियों ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे लोगों को सम्मानित भी किया।