गोरखपुर। मंगलवार को 27वां रोजा मुकम्मल हो गया। रोजेदारों ने नमाज पढ़कर, कुरआन-ए-पाक की तिलावत करके गुनाहों की माफी मांगी। मुफ्ती मुहम्मद शुएब रजा निजामी ने बताया कि जब ईद-उल-फित्र की मुबारक रात आती है तो इसे ईनाम की रात के नाम से पुकारा जाता है।
उन्होंने कहा कि ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा की रात में सवाब के लिए खूब इबादत करनी चाहिए। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है कि ईद तो दरअसल उन खुशनसीब मुसलमानों के लिए है जिन्होंने रमजानुल मुबारक को रोजा, नमाज और दीगर इबादतों में गुजारा। यह ईद उनके लिए अल्लाह की तरफ से मजदूरी मिलने का दिन है। ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फित्र अदा कर देना चाहिए। कसरत से सदका देना चाहिए। आपस में मुबारकबाद देना, नमाज के बाद हाथ मिलाना और गले मिलना बेहतर है। इससे भाईचारगी बढ़ती है।