एक जिला एक उत्पाद की अनूठी माटी कला टेराकोटा की राखियां इस रक्षाबंधन को खास बनाएंगी। अच्छी बनावट और रंगत वाली ये राखियां बनकर तैयार हैं। 15 जुलाई को प्रदर्शनी लगेगी। यहां मिट्टी से बनी इन रंग-बिरंगी राखियों की खरीदारी भी की जा सकेगी।
दिल्ली की डॉ. भावना अग्रवाल ने टेराकोटा का उत्पाद बनाने वाली महिलाओं को डिजाइन दी और बड़े पैमाने पर राखियां बनवाई हैं। डॉ. भावना का कहना है कि घर में रखी टेराकोटा की मूर्तियों की खूबसूरती को खूब सराहना मिली। इससे मनोबल बढ़ा और राखियां बनवाने का फैसला किया।
डॉ. भावना ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पांच साल पहले तक उपेक्षित रही गोरखपुर की इस माटी कला को विशेष पहचान दी। इससे रोजगार बढ़ा है। सरकार ने ब्रांडिंग का दायरा अंतरराष्ट्रीय कर दिया। लिहाजा, पारंपरिक शिल्प में नवाचार की झड़ी लग गई। अब भाइयों की कलाई पर सजने के लिए राखियां भी तैयार हैं।