सभी इमाम चौकों से जुलूस निकलकर बक्शीपुर पहुंचे। वहां से अलीनगर, बेनीगंज, ईदगाह रोड, जाफरा बाजार होते हुए कर्बला पहुंचे। ताजिया दफन करने के बाद जुलूस पुन: अपने-अपने इमाम चौकों पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस का केंद्र नखास चौक रहा।
ताजिया व रौशन चौकियों में देश और दुनिया की झलक देखने को मिली। गेहूं की ताजिया ने भी लोगों का ध्यान खींचा। जुलूस में शामिल अलम, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, सद्दे, ऊंट, घोड़े और ढोल-ताशे भी लोगों को अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे। बेहतरीन ताजिया, जुलूस व अखाड़ों को पुरस्कृत किया गया। मियां बाजार स्थित इमामबाड़ा मेले में खूब चहल-पहल रही।
रवायती अंदाज में निकला इमामबाड़ा इस्टेट का शाही जुलूस
गोरखपुर। दसवीं मोहर्रम पर इमामबाड़ा इस्टेट का रवायती शाही जुलूस शान से निकला। मियां साहब अस्वस्थ होने पर उनके पुत्र अयान अली शाह ने जुलूस की अगुवानी की। जहां-जहां अयान अली पहुंच रहे थे वहां उनका इस्तकबाल हो रहा था।
जुलूस बक्शीपुर स्थित हजरत कमाल शाह की मजार पर पहुंचा। वहां अयान अली ने फातिहा पढ़ी। इसके बाद जुलूस बक्शीपुर की ओर मुड़ा। जुलूस के सबसे आगे इमामबाड़ा इस्टेट का परचम उसके पीछे पैदल सवार हाथों में भाला लिए सिपाही, घुड़सवार दस्ता और उनके पीछे निजी अंगरक्षक चल रहे थे।
जुलूस में सोने-चांदी के अलम भी आकर्षण के केंद्र रहे। शाही जुलूस के पीछे शहर के कई मोहल्लों के इमाम चौकों से जुलूस निकला। जुलूस में रौशन चौकी और सद्दा तो था ही, करतब दिखाते नौजवान सभी का ध्यान खींच रहे थे। अयान अली ने जगह-जगह रुक कर गम का इजहार किया। जुलूस में इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम, सैयद इरशाद अहमद, हाजी सोहराब, जुल्फेकार अहमद, सैययद शहाब अहमद, मिन्नतुल्लाह, अजहर समी, ख्वाजा शमशुद्दीन आदि की विशेष भागीदारी रही।
सामूहिक रोजा इफ्तार का हुआ आयोजन
दसवीं मोहर्रम को तंजीम कारवाने अहले सुन्नत की ओर से इमामबाड़ा चिंगी शहीद तुर्कमानपुर में सामूहिक रोजा इफ्तार हुआ। जिसमें अकीदतमंदों ने मिलकर रोजा खोला।
नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में भी मिलकर रोजा खोला गया। इफ्तार में नायब काजी मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, निजामुद्दीन, साहब अहमद, लियाकत खान, मोहम्मद असलम, राजू, मनोव्वर अहमद, अनस, अलतमश, रमजा आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी तरफ अंजुमन ज्याए मुस्तफा नौजवान कमेटी ने मोहम्मदपुर जमुनहिया बाग में लंगर-ए-हुसैनी बांटा।