दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुए असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति सवालों के घेरे में आ गई है। नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत पर राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से दो महीने पहले जवाब-तलब किया था। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जवाब नहीं दिया गया। अब इसे गंभीरता से लेते हुए कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जानी ने कुलपति प्रो. राजेश सिंह को पत्र भेजकर अतिशीघ्र जवाब भेजने का निर्देश दिया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में वर्ष 2021 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था। असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा के दौरान सवाल अंग्रेजी में पूछे गए थे, जिसका अभ्यर्थियों ने विरोध किया। इस पर विश्वविद्यालय ने गलती सुधारते हुए पुन: 26 फरवरी 2023 को द्विभाषी माध्यम से परीक्षा कराई। परीक्षा को लेकर दो अभ्यर्थियों आदित्य नारायण क्षितिजेश एवं इतेंदु धर दुबे ने कुलाधिपति को पत्र भेजकर शिकायत की। पत्र के माध्यम से उन्होंने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़ा कर दिया।
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दोनों परीक्षार्थियों ने कुलाधिपति को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की ओर से विश्वविद्यालय परिनियम में आवश्यक संशोधन किए बगैर भर्ती प्रक्रिया को संपन्न कर रहा है, जो अवैधानिक है। राजभवन ने इस शिकायती पत्र को संज्ञान लेकर शिकायतकर्ता से शपथ पत्र पर साक्ष्य सहित प्रत्यावेदन मांगा था।
इसके बाद भी विश्वविद्यालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया की कार्यवाही को जारी रखा। इस संबंध में राजभवन के स्तर से कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जानी ने 26 जुलाई को पूरे मामले में जवाब स्पष्ट करने को कहा।
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