23 साल से हाईस्कूल के कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने वाली सहायक अध्यापिका सत्या सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया है। शिक्षिका के खिलाफ कुटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने की शिकायत हुई थी।
जांच में आरोप सही मिलने के बाद ये कार्रवाई हुई है। पिपरौली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय खपड़हवा में तैनात शिक्षिका सत्या सिंह की नियुक्ति 1997 में हुई थी। इनके खिलाफ शिकायत मिलने के बाद विभाग ने शिक्षिका को सत्यापन के लिए 24 जुलाई 2019 को बीएसए दफ्तर बुलाया।
एक शिक्षिका ने सामने आकर अपने हाईस्कूल समेत अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड मुहैया कराया। विभाग की ओर से हाईस्कूल के प्रमाणपत्र को सत्यापन के लिए बदायूं के इंटर कॉलेज में वर्ष 2019 में भेजा गया। जहां से प्रधानाचार्य ने उक्त रोल नंबर पर किसी दूसरी छात्रा के नाम का अंकपत्र जारी होने की जानकारी दी।
उसके बाद विभाग ने शिक्षिका को एक और नोटिस जारी कर दफ्तर में तलब किया गया। मगर शिक्षिका लगातार सत्यापन से दूरी बनाती रहीं। जिसके बाद विभाग ने जांच अधिकारी को विद्यालय पर जनवरी 2020 में भेजा गया। जहां से पता चला कि शिक्षिका 25 नवंबर 2019 से ही लगातार अनुपस्थित चल रही हैं।
इसके बाद विभाग ने आरोपी शिक्षिका के वेतन को बाधित करते हुए बर्खास्त कर दिया है। अब तक 47 शिक्षक बर्खास्त, 37 पर दर्ज है मुकदमा बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से दूसरे के प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने वाले अब तक 47 शिक्षिकों को बर्खास्त किया गया है। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी ने राजघाट थाने में 37 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।