वर्ष मरीज
2019 11473
2020 8658
2021 6789
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने कहा कि टीबी की दवा ज्यादा दिनों तक चलती है, लेकिन मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं, इस वजह से टीबी का संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। ऐसे केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मरीजों के फेफड़े और पेट में पानी भरने की भी शिकायतें मिल रही हैं। प्रतिदिन आठ से 10 मरीज आ रहे हैं। इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी भी कहते हैं।
आईएमए सचिव डॉ वीएन अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर पहले फेफड़े की टीबी वाले मरीज इलाज के लिए आते थे, लेकिन अब पेट, ग्लैंड, ब्रेन और बोन टीबी के मरीज भी आ रहे हैं। टीबी शरीर के नाखून और बाल को छोड़कर किसी भी हिस्से में हो सकती है। ऐसी स्थिति में अगर टीबी के लक्षण दिखते हैं तो तत्काल जांच कराएं। 70 फीसदी मरीजों में पल्मोनरी और 30 फीसदी में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी होती है।