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Gorakhpur News: 1.17 लाख नए भवन स्वामी और 90 हजार डिफाल्टरों से वसूलेंगे कर

Sat, 06 Jan 2024 10:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

समाजवादी पार्टी के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी और पूर्व उपसभापति जियाउल इस्लाम आपस में उलझ गए थे। जियाउल ने बैठक में पार्षद पतियों की मौजूदगी को सदन के खिलाफ बताया था। इस पर मेयर ने पार्षद प्रतिनिधियों को बाहर निकाल दिया।
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गोरखपुर नगर निगम। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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गोरखपुर नगर निगम 1.17 लाख नए भवन स्वामियों और 90 हजार डिफाल्टर स्वामियों से कर वसूलेगा। अभी 1.52 हजार आवास अभी नगर निगम के रिकॉर्ड में हैं। इनमें 60 हजार लोग टैक्स जमा करते हैं। इन्हीं में से 90 हजार को डिफाल्टरों की सूची में रखा गया है। इनकी सूची तैयार कर ली गई है।

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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि शासन की तरफ से नामित जीआईएस सर्वे वाली फर्म की रिपोर्ट में 1.17 लाख नए आवास सामने लाए हैं। इन मकानों का कभी टैक्स नहीं दिया गया है। इनमें करीब 30 हजार से अधिक प्लाॅट और खाली जमीन भी हैं। उन्होंने कहा कि अगर जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट गलत है, तो लोग अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि नगर निगम की तरफ से फुटकर व्यापारियों को जल्द ही वेंडिंग जोन उपलब्ध करवाया जाएगा। बताया कि सरकारी भूमि को चिह्नित कर वहां वेंडिंग जोन बनाया जाएगा।
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संपत्ति कर की आपत्ति पर लगने वाला शुल्क खत्म
मुख्य कर अधिकारी विनय राय ने बताया कि पहले जीआईएस सर्वे में संपत्ति कर पर आपत्ति शुल्क जमा करवा लोग अपना पक्ष रखते थे। इसमें 100 रुपये की सेवा शुल्क रशीद काटी जाती थी। नगर निगम ने जनहित को देखते हुए और जीआईएस सर्वे पर एक मत नहीं होने पर लोगों की सुविधा के लिए 100 रुपये के शुल्क को खत्म कर दिया है। अब अगर किसी को संपत्ति कर के रूप में अधिक बिल आ जाएगा तो उसे बिना शुल्क जमा करवाए ही नगर निगम में अपनी आपत्ति जमा दर्ज करवा सकता है।

 

नगर निगम के इतिहास में पहली बार इतनी लंबी बैठक चली
नगर निगम के इतिहास में बृहस्पतिवार को नगर निगम बोर्ड की पहली बार इतनी लंबी बैठक चली है। पार्षदों के साथ अधिकारियों के सामंजस्य की वजह से करीब 9 घंटे तक चली बैठक शांति के साथ निपटा दी गई। इसके पहले अंजू चौधरी जब मेयर थी, उस समय ऐसी ही एक बैठक करीब 6 घंटे तक चली थी।
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नगर निगम में चलती रही सपा पार्षदों को उलझने की चर्चा
समाजवादी पार्टी के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी और पूर्व उपसभापति जियाउल इस्लाम आपस में उलझ गए थे। जियाउल ने बैठक में पार्षद पतियों की मौजूदगी को सदन के खिलाफ बताया था। इस पर मेयर ने पार्षद प्रतिनिधियों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद पूर्व पार्षद के निधन पर शोक सभा दो मिनट की हुई और इसके बाद बैठक को लेकर मेयर से पार्षदों से सहमति मांगी। विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा अगर नियमों की बात करेंगे अध्यक्ष जी तो बैठक भी स्थगित होनी चाहिए। इसी बात को लेकर दोनों के बीच पांच से सात मिनट तक बहस भी हो गई।
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