बिना जीएसटी के अगर कोई भी सामान ग्राहक खरीदता है तो खराब होने पर वारंटी अवधि में ठीक करने में दिक्कत होती है। सर्विस सेंटर पर नॉर्मल बिल को नहीं मानते हैं। सिर्फ जीएसटी बिल ही मान्य होता है। कई बार तो ग्राहक को बिल देने के बाद भी वारंटी का लाभ नहीं मिल पाता। कई बार तो दुकानदार भी सर्विस सेंटर का पेच फंसने पर उस आइटम का जीएसटी बिल बाद में भी नहीं दे पाते हैं।
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नेपाल टायर भेजने में भी पकड़ी गई थी कर चोरी
करीब एक महीने पहले ऐसे ही सेंट्रल जीएसटी की टीम ने हिंदी बाजार के एक टायर व्यापारी को करोड़ों रुपये के टायरों को फर्जी तरीके से बेचकर कर चोरी करते हुए पकड़ा था। जांच में सामने आया था कि बिना वजूद वाली फर्में से टायरों की खरीद-बिक्री दिखाकर कर चोरी करते हुए इसे नेपाल भेजा जा रहा था। ऐसे ही बिना रिकाॅर्ड के दूसरे राज्यों से मंगाए सामान पर बिना लिखा-पढ़ी के व्यापार करते हुए कर चोरी कर ली जाती है।
एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड 2 देवमणि शर्मा ने कहा कि खरीदार बिना जीएसटी नंबर वाले पर्ची पर खरीदारी न करें। इससे उनका ही नुकसान होगा। अगर कोई बिल देने से मना करता है तो वह दुकानदार से लिखित कारण मांग सकते हैं। व्यापारी को दुकान से बेचे गए उत्पाद का ऑनलाइन बिल ही देना है।