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Gorakhpur News: फौरी राहत के लिए एआई से पूछ रहे दवा...बाद में बढ़ जा रही तकलीफ

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गोरखपुर। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती पहुंच अब मर्ज के इलाज के तरीके को भी प्रभावित कर रही है। कई लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय अपनी जांच रिपोर्ट एआई प्लेटफॉर्म पर दिखाकर दवाइयों के बारे में सलाह ले रहे हैं। शुरुआत में इससे कुछ समय के लिए राहत मिलती है लेकिन बाद में कई मामलों में समस्या और बढ़ जाती है। इसके बाद मरीज गंभीर स्थिति में डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
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एम्स में इन दिनों इस तरह के कई मरीज आए हैं, जिन्होंने पहले इंटरनेट या एआई की सलाह के आधार पर दवा ली और बाद में परेशानी बढ़ने पर अस्पताल का रुख किया। एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय मिश्रा के अनुसार, एआई सामान्य जानकारी तो दे सकता है लेकिन हर मरीज की शारीरिक स्थिति, एलर्जी, पुरानी बीमारी और दवाओं की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है।
स्किन डिपार्टमेंट के डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि तकनीक और एआई जानकारी के लिए उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इलाज का विकल्प नहीं हैं। मरीजों को चाहिए कि किसी भी बीमारी या जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा लेने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लें ताकि समय पर सही इलाज मिल सके और जटिलताओं से बचा जा सके।
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केस एक
देवरिया के 32 वर्षीय एक युवक को पिछले कुछ दिनों से शरीर में लाल चकत्ते और खुजली की समस्या हो रही थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट और लक्षण एआई प्लेटफॉर्म पर डालकर दवा के बारे में जानकारी ली और मेडिकल स्टोर से क्रीम और टैबलेट खरीदकर इस्तेमाल शुरू कर दिया। शुरू में उन्हें थोड़ी राहत मिली लेकिन कुछ ही दिनों बाद चकत्ते पूरे शरीर में फैल गए और जलन बढ़ गई। इसके बाद वह एम्स के स्किन विभाग पहुंचे। जांच में पता चला कि गलत दवा के कारण एलर्जी और अधिक बढ़ गई थी। डॉक्टरों के इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।


केस दो
कुशीनगर के 45 वर्षीय एक व्यक्ति को बुखार और कमजोरी की शिकायत थी। उन्होंने खून की जांच रिपोर्ट एआई को दिखाकर सलाह ली और उसी के आधार पर कुछ दवाइयां लेना शुरू कर दिया। दो-तीन दिन तक बुखार थोड़ा कम रहा, लेकिन बाद में तेज बुखार, चक्कर और कमजोरी बढ़ गई। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें एम्स गोरखपुर के जनरल मेडिसिन विभाग लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन्हें संक्रमण था, जिसका सही इलाज समय पर नहीं होने से समस्या बढ़ गई।
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