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गोरखपुर: लक्षण डेंगू के, लेकिन रिपोर्ट आ रही निगेटिव, बढ़ती जा रही मरीजों की संख्या

Tue, 01 Nov 2022 11:59 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि पिछले दो दिन के अंदर करीब 180 से अधिक मरीजों की डेंगू की जांच की गई है। इनमें करीब 80 मरीज डेंगू के मिले हैं।
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डेंगू। - फोटो : istock
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में डेंगू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन सबके बीच ऐसे मरीज भी मिल रहे हैं, जिनमें डेंगू के लक्षण तो हैं, लेकिन जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। डॉक्टर इसे नॉन डेंगू वायरल सिंड्रोम बताकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में ऐसे सैकड़ों मरीज भर्ती हैं।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि पिछले दो दिन के अंदर करीब 180 से अधिक मरीजों की डेंगू की जांच की गई है। इनमें करीब 80 मरीज डेंगू के मिले हैं। लेकिन, 100 के करीब मरीजों के प्लेटलेट्स कम मिले हैं साथ ही उनका टोटल ल्यूकोसाइट काउंट (टीएलसी) भी काफी कम मिला है। लेकिन, ऐसे मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

यह ज्यादा चिंताजनक है। क्योंकि, ऐसे मरीज खुद को निगेटिव मानकर चल रहे हैं। जबकि, ये उनके लिए ज्यादा खतरनाक है। यही वजह है कि डॉक्टर उनका इलाज नॉन डेंगू वायरल सिंड्रोम मानकर कर रहे हैं। अगर ऐसे मरीज इलाज में लापरवाही करते हैं तो उनकी जान भी जा सकती है। इसलिए अगर प्लेट्लेटस और टीएलसी रिपोर्ट कम आ रही है तो डॉक्टर के सलाह पर ही दवा का सेवन करें।
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हर दिन भर्ती हो रहे तीन से चार मरीज

जिला अस्पताल के इमरजेंसी में आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या भी पिछले एक सप्ताह के अंदर बढ़ी है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि हर दिन बुखार के तीन से चार मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनके प्लेटलेट्स काउंट 25 हजार से कम आ रहे हैं। जबकि, संक्रमण बताने वाले मार्कर टीएलसी की भी रिपोर्ट दो हजार से नीचे आ जा रही है। जबकि, टीएलसी स्वास्थ्य व्यक्ति में कम से कम 10 हजार होनी चाहिए। ऐसे मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। इनकी डेंगू रिपोर्ट निगेटिव मिल रही है।

बीआरडी में बढ़ती जा रही संख्या
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओपीडी में हर दिन 300 से अधिक मरीज बुखार के आ रहे हैं। इनमें 20 से 25 फीसदी मरीज नॉन डेंगू वायरल सिंड्रोम के शामिल हैं। जबकि, 15 से 20 फीसदी मरीज डेंगू के मिल रहे हैं। अन्य मरीजों में मलेरिया, वायरल बुखार के  लक्षण मिल रहे हैं। इमरजेंसी की बात करें तो यहां हर दिन 10 से 12 बुखार के मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। इनमें तीन से चार मरीजों ही डेंगू के मिल रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों में लक्षण तो डेंगू के हैं, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।

शहर के ये इलाकें डेंगू से ज्यादा प्रभावित
शहर में डेंगू मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले पांच साल के अंदर डेंगू के सबसे अधिक मरीज इस साल मिल चुके हैं। शहर की बात करें तो कालीबाड़ी, बसंतपुर, निजामपुर, दरगहिया, हांसूपुर, नरसिंहपुर, महेवा, तुर्कमानपुर, रसूलपुर, दीवान बाजार, शेखपुर, साहबगंज, बेतियाहाता और रेलवे का बिछिया कॉलोनी है। इन स्थानों पर सबसे अधिक मरीज मिले हैं।

कागजों में हुआ छिड़काव, फैल गए मरीज
अक्तूबर में हुई बारिश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संचारी रोग अभियान चलाया। अभियान के तहत डेंगू प्रभावित इलाकों में छिड़काव के निर्देश आलाधिकारियों ने दिए थे। लेकिन, विभाग ने कागजों में ही छिड़काव कर वाहवाही लूट ली। इन सबके बीच डेंगू तेजी से शहर में फैल गया। स्थिति ऐसी हो गई है कि गोरखनाथ इलाके के एक बड़े निजी अस्पताल में करीब 60 मरीज डेंगू के भर्ती हैं। इसके अलावा शहर के 100 से अधिक अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है।
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