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डॉक्टर की सलाह: लक्षण मलेरिया जैसे पर रिपोर्ट में मौसमी बुखार, बरतें सावधानी

Wed, 30 Aug 2023 05:12 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बरसात में उगने वाली झाड़ियों में माइट्स (परजीवी) की संख्या बढ़ जाती है। इनकी वजह से स्क्रब टाइफस के मामले आते हैं। इसके अलावा वॉटर वार्न डिजीज और वेक्टर वार्न डिजीज के मामले भी खूब बढ़ते हैं।
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उमस भरी गर्मी और रुक-रुककर हो रही बारिश ने बच्चों की सेहत बिगाड़ दी है। बच्चों में सिर से घुटने तक तेज बुखार और कंपकंपी के लक्षण आ रहे हैं, जबकि उनके पैर या हाथ ठंडे पड़ जा रहे हैं। परिजन मलेरिया या एईएस की आशंका से सहम जा रहे हैं। तीन दिन बाद जब जांच हो रही है तो रिपोर्ट मौसमी बुखार की आ रही है। बदलते लक्षण से डॉक्टर भी हैरान हैं।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर दिन 200 से 250 के करीब बच्चे ओपीडी में आते हैं। बीआरडी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि करीब 15 दिन से बीमार बच्चों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। तेज बुखार और कंपकंपी के लक्षण मलेरिया में भी दिखते हैं और मौसमी बुखार में भी ऐसा दिख रहा है। आमतौर पर ऐसे मामले तीन से पांच दिन में ठीक हो जा रहे हैं। कुछ-कुछ बच्चों में इसका असर सप्ताह भर तक बना रहता है।

एम्स की ओपीडी में भी हर दिन ऐसे मामले आ रहे हैं। एम्स के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार बता रहे हैं कि मौसम में बार-बार बदलाव बच्चों को बीमार बना रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव के अनुपात में शरीर भी अपना तापमान नियंत्रित करता है। इसी के चलते बच्चों में तेज बुखार के लक्षण दिख रहे हैं।
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आमतौर पर ऐसा बुखार केवल पैरासिटामॉल की एक खुराक देने भर से ही दो-तीन घंटे में उतर जाता है। तीन से चार दिन मेंं बच्चा स्वस्थ हो जाता है। अगर तीन दिन में बुखार न ठीक हो और बच्चे में कोई अन्य लक्षण भी दिख रहे हों तो उसे विशेषज्ञ के पास ले जाएं, अन्यथा वह स्वत: ही ठीक हो जाएगा।
 

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घास और फंफूद भी बढ़ा रहे बीमारी

बरसात में उगने वाली झाड़ियों में माइट्स (परजीवी) की संख्या बढ़ जाती है। इनकी वजह से स्क्रब टाइफस के मामले आते हैं। इसके अलावा वॉटर वार्न डिजीज और वेक्टर वार्न डिजीज के मामले भी खूब बढ़ते हैं। इस मौसम में हर साल डायरिया, टाइफाइड, पीलिया आदि के मामले आते हैं। इस साल भी स्थिति वैसी ही है।

लोग स्वच्छता उपायों पर ध्यान नहीं देते और बीमारी की चपेट में आते हैं। सबसे अधिक दिक्कत घरों में सीलन व फंफूद के चलते आती है। बारिश के दौरान तमाम घरों की दीवारों पर सीलन होता है और अगल-बगल झाड़ियां बढ़ जाती हैं। इसमें मच्छर और वायरस पलते हैं जो बीमारी को बढ़ावा देते हैं। दीवारों पर सीलन और फंफूद के चलते लोग श्वसन रोग के शिकार हो जाते हैं।

इन बातों का रखें ख्याल
  • स्वच्छता के लिए कोविड गाइड लाइन का पालन जरूर करें।
  • ताजा भोजन पकाएं और खाएं, सुबह का बना शाम तक तभी खाएं जब उसे सुरक्षित रखा हो।
  • पानी को उबालकर ठंडा करें इसके बाद पीएं।
  • गंदा पानी, घास और सीलन को साफ करें।
  • घर के पर्दों को समय-समय पर धूप में सुखाते रहें।
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