बरसात में उगने वाली झाड़ियों में माइट्स (परजीवी) की संख्या बढ़ जाती है। इनकी वजह से स्क्रब टाइफस के मामले आते हैं। इसके अलावा वॉटर वार्न डिजीज और वेक्टर वार्न डिजीज के मामले भी खूब बढ़ते हैं। इस मौसम में हर साल डायरिया, टाइफाइड, पीलिया आदि के मामले आते हैं। इस साल भी स्थिति वैसी ही है।
लोग स्वच्छता उपायों पर ध्यान नहीं देते और बीमारी की चपेट में आते हैं। सबसे अधिक दिक्कत घरों में सीलन व फंफूद के चलते आती है। बारिश के दौरान तमाम घरों की दीवारों पर सीलन होता है और अगल-बगल झाड़ियां बढ़ जाती हैं। इसमें मच्छर और वायरस पलते हैं जो बीमारी को बढ़ावा देते हैं। दीवारों पर सीलन और फंफूद के चलते लोग श्वसन रोग के शिकार हो जाते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
- स्वच्छता के लिए कोविड गाइड लाइन का पालन जरूर करें।
- ताजा भोजन पकाएं और खाएं, सुबह का बना शाम तक तभी खाएं जब उसे सुरक्षित रखा हो।
- पानी को उबालकर ठंडा करें इसके बाद पीएं।
- गंदा पानी, घास और सीलन को साफ करें।
- घर के पर्दों को समय-समय पर धूप में सुखाते रहें।