आरोपी रुद्रांश पांडेय लखनऊ में खुद को एक समाचार पत्र का पत्रकार भी बताया करता था, जिसकी मदद से उसने वहां पर अपनी पैठ बना ली थी। कई बैंक कर्मचारियों को उसने लखनऊ के गेस्ट हाउस में कमरा भी दिलाया था। अब पुलिस एक-एक कड़ी जोड़कर कर पूरे गिरोह की जांच में जुट गई है।
पुलिस का मानना है कि फरार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद कई जानकारियां और सामने आ जाएंगी, जिसकी मदद से यह पता चलेगा कि आखिर फर्जी दस्तावेज को इन लोगों ने किसकी मदद से तैयार कराया और बैंक की ओर से उसकी जांच कर किसने पास किया। इसी के बाद बैंक कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक की भूमिका सामने आ जाएगी।
यह हुआ था
बस्ती जिले के मुरलीजोत में रहने वाला रुद्रांश पांडेय अपनी मां अर्चना व पिता राजेश के साथ शाहपुर इलाके के राप्तीनगर, ग्रीन वैली में मकान बनवाकर रहता है। मई 2022 को अर्चना व उनके पति राजेश ने आईसीआईसीआई बैंक की मेडिकल काॅलेज रोड शाखा में होम लोन के लिए आवेदन किया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर 31 मई 2022 को दो करोड़ रुपये का लोन पास करा लिया। अगस्त 2022 में बालाजीपुरम राप्तीनगर में रहने वाले रियाज नाम के व्यक्ति ने होम लोन के लिए आवेदन किया।
खुद को भारतीय खाद्य निगम का ठेकेदार बताते हुए रियाज इंटरप्राइजेज के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किए। लोन पास कराने की पैरवी रुद्रांश कर रहा था। अगस्त में रियाज का भी 2.45 करोड़ रुपये का होम लोन पास हो गया। तीन माह के बाद किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि फर्जी दस्तावेज पर रुद्रांश ने अपनी मां अर्चना व रियाज के नाम पर लोन कराया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भिजवाया।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस जेल भेजे गए मास्टरमाइंड को रिमांड पर लेगी। उससे पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। पुलिस की ओर से बैंक को भी पत्र भेजा गया है, अभी इसमें कई और लोगों के शामिल होने की आशंका है। पुलिस तथ्यों के आधार पर गहराई से जांच कर रही है, जल्द ही पूरे मामला का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।