कोरोना खौफ के बीच सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में छह हजार से ज्यादा ऑपरेशन नहीं हो सके। जिस बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा ऑपरेशन होते थे, वहां अब नाम मात्र के ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी जटिल ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद पहले गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों का ऑपरेशन किया जाएगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित महिला जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों को मिलाकर हर रोज शहर में छोटे से लेकर बड़े के करीब 300 से अधिक ऑपरेशन होते थे। मौजूदा समय में सभी जगहों पर ओटी बंद चल रही है।
सिर्फ इमरजेंसी में ऑपरेशन चल रहे हैं। वह भी ज्यादा गंभीर होने पर ही किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में तो इमरजेंसी में भी ऑपरेशन बंद किए जा चुके हैं। डॉक्टरों का मानना है कि लॉकडाउन में करीब 6000 हजार से अधिक ऑपरेशन टले हैं। जल्द ही नई तारीखों पर ऑपरेशन किए जाएंगे।
बीआरडी में होते थे 50 से 60 ऑपरेशन
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बात करें तो लॉकडाउन के पहले 50 से 60 ऑपरेशन प्रतिदिन हो जाते थे। लेकिन, मौजूदा समय में केवल इमरजेंसी में ही ऑपरेशन हो रहे हैं। उसकी भी संख्या आठ से 10 के बीच ही रह गई है। जबकि, पहले आर्थो, नाक, कान, गला, सर्जरी (पेट संबंधी ऑपरेशन), गायनी के ऑपरेशन होते थे, जो इस वक्त बिल्कुल नहीं हो रहे है। वहीं, जिला अस्पताल की बात करें तो पहले करीब 15 से 20 ऑपरेशन हो जाते थे, जो पूरी तरह से बंद है।
अंश ऑर्थोपेडिक सेंटर के ऑर्थो सर्जन डॉ अमित मिश्रा ने बताया- लॉकडाउन की वजह से इस वक्त ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इमरजेंसी में पुराने तरीके से प्लास्टर किए जा रहे है। यह मरीजों के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में मरीजों के हाथ पैर टेढ़े होने के चांस ज्यादा है। इसके अलावा इलेक्टिव सर्जरी तो बिल्कुल नहीं हो पा रही है। घुटना, कूल्हा प्रत्यारोपण ज्यादा दिन छोड़ना ठीक नहीं है। मरीजों को इससे ज्यादा दिक्कत होगी।
त्रिमूर्ति हॉस्पिटल के ऑर्थो सर्जन डॉ संजीव सिंह ने बताया- पहले प्रतिदिन तीन से चार ऑपरेशन हो जाते थे, लेकिन लॉकडाउन में ऑपरेशन पूरी तरह से बंद है। ऊपर से ऑपरेशन में लगने वाला सामान इंप्लाट्स, स्क्रू, राड आदि नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों की वेटिंग बढ़ती जा रही हैं। हड्डी के ऑपरेशन में दिक्कत यह है कि ज्यादा दिनों तक रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि इसमें मरीजों को दर्द ज्यादा होता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया- ओपीडी पूरी तरह से बंद है। केवल फ्लू कॉर्नर की ओपीडी चल रही है। डे-केयर ऑपरेशन भी बंद है। केवल इमरजेंसी में वही ऑपरेशन किए जा रहे है, जो बहुत जरूरी है। पहले रोजाना 50 से अधिक ऑपरेशन हो जाते थे। डिलीवरी वाले ऑपरेशन और इमरजेंसी में ही ऑपरेशन इस वक्त हो रहे हैं। अब पहले ज्यादा गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ एके सिंह ने बताया- जिला अस्पताल में फ्लू कार्नर की ओपीडी चल रही है। अन्य ओपीडी बंद है। लॉकडाउन में इमरजेंसी चल रही है। इमरजेंसी में ऑपरेशन नहीं हो रहा है। लॉकडाउन खुलने के बाद पहले गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा।