सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल पिता को एक बेटा इसलिए नहीं बचा सका, क्योंकि उन्हें सही वक्त पर खून नहीं मिला। खून न मिलने की वजह से उनकी जान चली गई। उस वक्त बेटे की उम्र महज 12 साल थी। ऐसे में वह रक्तदान नहीं कर सकता था। उस सदमे ने बेटे के दिमाग में ऐसा जज्बा भरा कि 18 साल होते ही रक्तदान करने की मुहिम में जुट गए। अब तक 25 बार रक्तदान कर चुके हैं।
जानकारी के अनुसार कल्याणपुर के तिवारीपुर के रहने वाले सुमित के पिता की मौत जब हुई थी, तब वह महज 12 साल के थे। सुमित के मुताबिक पिता सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस वक्त उन्हें नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया, जहां से यह कहकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया कि खून की तत्काल जरूरत है।
खून के लिए जिला अस्पताल ले जाते समय ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। उस वक्त कम उम्र होने की वजह से खून नहीं दे सकता था। इसका बहुत अफसोस हुआ। आसपास के लोगों ने भी खून देने की कोई पहल नहीं की। अगर समय से एक से दो यूनिट खून मिल जाता तो शायद पिता की जान बच जाती। पहली बार 18 साल की उम्र में एनसीसी बटालियन में रक्तदान किया।
इसके बाद से यह सिलसिला शुरू हुआ, जो अब तक चल रहा है। सुमित के मुताबिक एक फोन पर कहीं से भी यह सूचना मिल जाती है कि ब्लड की जरूरत है, तो सारा काम छोड़कर रक्तदान करने पहुंच जाता हूं। जब तक शरीर साथ देगा, तब तक रक्तदान करता रहूंगा।