भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े शनिवार को अयोध्या के लिए रवाना हो गए। उनके जाने के बाद शुक्रवार को हुई बैठकों के निर्णय और उन्हें दिए गए सुझावों को लेकर पार्टी के भीतर राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई। सबसे ज्यादा चर्चा देवरिया के पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह के उस सुझाव की रही जिसमें उन्होंने कहा कि यदि 2017 जैसी प्रचंड जीत दोहरानी है तो कम से कम 50 प्रतिशत के टिकट काट दिए जाने चाहिए।
शुक्रवार को पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के साथ मैराथन मंथन में यूपी प्रभारी ने पूर्व जिलाध्यक्षों और पूर्व विधायकों की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा था कि गुटबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने ये भी सख्त संदेश दिया कि 2027 में 2017 जैसी जीत दोहरानी है। इसी दौरान देवरिया के पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि आधे विधायकों के टिकट बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा आज भी मोदी और योगी पर कायम है और बुनियादी सुविधाओं बिजली-पानी में सुधार हुआ है, बस स्थानीय चेहरों को लेकर रणनीति बदलनी होगी।
62 विधानसभा क्षेत्रों का रिकॉर्ड था तावड़े के पास
पार्टी के पदाधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी के पास गोरखपुर क्षेत्र की सभी 62 विधानसभा सीटों का आंकड़ा था। बैठक में जब कोई जनप्रतिनिधि या संगठन का पदाधिकारी किसी मुद्दे को उठाता तो वह उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जवाब देते थे।
कुशीनगर के प्रदर्शन को लेकर एक पदाधिकारी ने लोकसभा चुनाव में कम अंतर से सीट गंवाने के पीछे सपा प्रत्याशी के बिरादरीगत वोटों को वजह बताया। साथ ही सहयोगी दल को दी गई दो सीटों का भी जिक्र किया।
इस पर तावड़े ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि कुशीनगर में विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर करीब 33 हजार था जो लोकसभा चुनाव में घटकर 13 हजार रह गया। उन्होंने कहा कि सपा प्रत्याशी की बिरादरी का वोट वहां बहुत कम था। कमियों की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने के बजाय आत्ममंथन की जरूरत है।
पूर्व सांसद ने यूजीसी का मुद्दा उठाया
पूर्व राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद ने यूजीसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाई गई व्यवस्था को लेकर अलग-अलग वर्गों की अलग राय है। सवर्ण वर्ग इसे हटाने, जबकि पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग इसे लागू करने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसी भी समुदाय को परेशानी न हो और किसी वर्ग को नुकसान न पहुंचे।