इंटर की पढ़ाई के बाद वह सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए बीए कर रहे हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया में बीए करने वाले अधिकतर विद्यार्थियों का लक्ष्य सिविल सर्विसेज या अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना है। वह बीए की पढ़ाई के लिए विषय का चयन भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के अनुरूप कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों के लिए बीए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी और हिंदी आदि विषय बने हुए हैं। बीए में इन विषयाें की अधिकतर सीटें प्रथम काउंसिलिंग में ही भर गईं। इन विषयों के प्रवेश नहीं मिलने पर वह दूसरे विषय का चयन कर रहे हैं।
बीए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी, अर्थशास्त्र आदि विषयों में प्रवेश पाना विद्यार्थियों की प्राथमिकता रही। परिणाम स्वरूप प्रथम काउंसिलिंग में ही इन विषयों की अधिकतर सीटें भर गईं। यही आलम परास्नातक में भी देखने को मिली। इन विषयों से एमए करने के लिए अधिक आवेदन आए थे। एमए हिंदी, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, प्राचीन इतिहास विषय में 132 सीटें हैं। अधिकतर फुल हो गई हैं।
कम आवेदन आने से इन विषयों की नहीं हुई प्रवेश परीक्षा
एमए संस्कृत में 132 सीट के सापेक्ष 50 आवेदन आए थे। सीटों के सापेक्षआधे से भी कम आवेदन आने पर प्रवेश परीक्षा नहीं कराई गई। काउंसिलिंग में सभी अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए बुलाया गया था, लेकिन 31 ने ही काउंसिलिंग कराने पहुंचे। दर्शनशास्त्र, रक्षा अध्ययन जैसे विषय में भी सीटों के बराबर आवेदन नहीं आने के कारण प्रवेश परीक्षा नहीं कराई गई। रक्षा अध्ययन में 55 सीटों के सापेक्ष 25 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई है। एमए उर्दू में 66 सीटों के लिए करीब 100 आवेदन आए थे। इसमें से अभी 52 सीटों पर ही अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराए हैं।
गोविवि समन्वयक प्रवेश परीक्षा डॉ. विनय सिंह ने कहा कि बीए और एमए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी व अर्थशास्त्र में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों में रुझान अधिक है। पहले से दूसरी काउंसिलिंग में ही इन विषयों की सीटें फुल हो गई। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिए यह विषय पहली पसंद बने हुए हैं। वहीं कुछ विषयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों का रुझान कम हुआ है।