दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को प्री-पीएचडी परीक्षा के पहले दिन कुछ विद्यार्थियों ने जमकर हंगामा किया। पहले परीक्षा का बहिष्कार किया और फिर उत्तर पुस्तिकाएं फाड़ दी। जिसके बाद विवि प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी। केंद्राध्यक्ष प्रो. एसके सिंह की रिपोर्ट पर परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न करने और उत्तर पुस्तिका फाड़ने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से निष्कासित करने, प्रवेश पर प्रतिबंध तथा छात्रावास की सुविधा से भी वंचित करने का निर्णय लिया गया। मामले में निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष अमन यादव सहित चिह्नित किए गए 17 विद्यार्थियों के साथ अन्य के खिलाफ रात में कैंट थाने में तहरीर दी गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी ब्यान में कहा गया कि परीक्षा का फार्मेट वैसा ही था, जैसा पहले बताया गया था। प्रथम प्रश्न पत्र रिसर्च मेथोडोलॉजी की परीक्षा कुल 65 अंक की थी, जिसमें 20 अंक का सब्जेक्टिव तथा 45 अंक का ऑब्जेक्टिव पेपर था। सब्जेक्टिव प्रश्न विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा ही तैयार किया गया था। जबकि ऑब्जेक्टिव प्रश्न वाह्य परीक्षकों द्वारा तैयार किया गया था।
प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम के द्वितीय प्रश्नपत्र कंप्यूटर एप्पलीकेशन की परीक्षा पूर्व निर्धारित तिथि नौ जनवरी को होगी। निष्कासित विद्यार्थी इस परीक्षा में भाग नहीं ले पाएंगे।
प्री-पीएचडी की परीक्षा को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे विद्यार्थी मायूस लौटे। विद्यार्थियों का कहना था कि पेपर आसान था। लेकिन, कुछ देर बाद हंगामा होने लगा। कापियां फाड़ दी गई। यह बिल्कुल गलत हुआ है।
विश्वविद्यालय में कापियां फाड़ने की घटना नई नहीं है। इसके पहले वर्ष 1999-2000 में सेंट एंड्रयूज कॉलेज में विधि की परीक्षा के दौरान कापियां फाड़ दी गई थीं। इसका खामियाजा सभी विद्यार्थियों को उठाना पड़ा था। सत्र ही विलंब हो गया।