गोरखपुर। पशु तस्करी के बड़े नेटवर्क का संचालन का आरोपी तस्कर जवाहिर यादव को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए एसटीएफ शनिवार को एसटीएफ कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी। एसटीएफ की मानें तो जवाहिर के गिरोह की पकड़ प्रदेश और पड़ोसी जिलों तक फैली है। उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि जवाहिर यादव वर्ष 2016 से पशु तस्करी के धंधे में उतर गया था। शुरुआती वर्षों में वह छोटे स्तर पर काम करता था, लेकिन कुछ ही समय में उसने एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। एसटीएफ के अनुसार, उसके गिरोह में 60 से अधिक सक्रिय गुर्गे हैं, जो परिवहन, खरीद–फरोख्त, रास्ता क्लियर कराने और हथियारबंद सुरक्षा जैसे काम संभालते हैं। नौ वर्षों के भीतर जवाहिर और उसके गैंग के खिलाफ कुशीनगर, प्रयागराज और गोरखपुर में कुल 28 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसमें पशु तस्करी, रंगदारी, बलवा, जानलेवा हमला, अवैध हथियार रखने और पुलिस टीम पर हमला जैसी धाराएं शामिल हैं। कई मामलों में वह लंबे समय तक भागा भी रहा, जिसका पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख है।
विरोध करने वालों को बना देते थे निशाना
एसटीएफ की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, पशु तस्करी में बाधा बनने वाले ग्रामीणों, प्रतिस्पर्धियों या पुलिस की कार्रवाई के दौरान गिरोह के गुर्गे फायरिंग करने से भी नहीं हिचकते थे। कई बार ग्रामीण इलाकों में उनके ट्रकों को रोके जाने पर हथियारों के बल पर धमकी दी गई और घटनाओं को अंजाम दिया गया।
कस्टडी रिमांड में खुल सकते हैं नेटवर्क के कई राज
एसटीएफ प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह का कहना है कि जवाहिर से पूछताछ जरूरी है क्योंकि गिरोह के तमाम गुर्गे अभी भागे हुए हैं। तस्करी की आय से जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़नी बाकी हैं। रिमांड मिलने पर पुलिस उससे रूट प्लान, वाहन नंबर, सप्लाई चेन, अवैध हथियार सप्लायर और संरक्षण देने वाले संपर्कों की जानकारी हासिल करेगी।
पशु तस्करी पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस का मानना है कि जवाहिर तस्करी नेटवर्क का संचालन करने वाला मुख्य व्यक्ति है। यदि उससे पूछताछ में ठोस जानकारी मिलती है तो प्रदेश के कई जिलों में एक साथ कार्रवाई की जा सकती है।